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बिहार: सीतामढ़ी में खाद विक्रेताओं का विरोध, खरीद-बिक्री दर में अंतर से नाराज; उठाव रोकने की चेतावनी
Wed, 23 Sep 2026 07:36 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 07:36 PM IST
सार
सीतामढ़ी में खाद की खरीद और सरकारी बिक्री दर के अंतर से खुदरा विक्रेता नाराज हैं। बथनाहा और रीगा के विक्रेताओं ने खाद उठाव रोकने की चेतावनी दी है। उन्होंने एफओआर व्यवस्था, टैगिंग खत्म करने और उचित मार्जिन की मांग की है।
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खुदरा विक्रेताओं का विरोध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सीतामढ़ी जिले में उर्वरक की खरीद कीमत और सरकार द्वारा निर्धारित बिक्री दर के बीच बढ़ते अंतर को लेकर खुदरा उर्वरक विक्रेताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है। बथनाहा के बाद अब रीगा प्रखंड के खुदरा विक्रेताओं ने भी एकजुट होकर खाद का उठाव रोकने की चेतावनी दी है। विक्रेताओं का कहना है कि उचित खरीद दर और सम्मानजनक व्यापारिक व्यवस्था मिलने तक वे खाद का उठाव नहीं करेंगे।
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बथनाहा प्रखंड में खुदरा उर्वरक विक्रेता संघ के अध्यक्ष गोपाल महतो के नेतृत्व में विक्रेताओं ने प्रखंड कृषि पदाधिकारी को लिखित आवेदन सौंपकर अपनी मांगें रखीं। वहीं, रीगा प्रखंड अध्यक्ष रामरेखा प्रसाद ने भी सभी विक्रेताओं को एकजुट करते हुए संघर्ष की चेतावनी दी है। विक्रेताओं का कहना है कि वे किसानों को सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराने के पक्ष में हैं, लेकिन लगातार घाटा सहकर व्यापार चलाना संभव नहीं है।
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विक्रेताओं के मुताबिक, उनकी मुख्य परेशानी थोक और खुदरा दरों के बीच बड़ा अंतर है। उनका आरोप है कि थोक स्तर पर यूरिया 310 से 320 रुपये प्रति बोरी और डीएपी 1600 से 1800 रुपये प्रति बोरी तक की दर पर मिल रहा है, जबकि किसानों को खाद सरकार द्वारा निर्धारित बिक्री दर पर ही देनी पड़ती है।
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विक्रेताओं का कहना है कि खरीद-बिक्री के अंतर के अलावा दुकान का किराया, बिजली बिल, कर्मचारियों का वेतन, परिवहन खर्च और डिजिटल भुगतान से जुड़े प्रशासनिक खर्च भी उन्हें ही वहन करने पड़ते हैं। ऐसे में वास्तविक खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। बथनाहा संघ के उपाध्यक्ष वीरेंद्र कुशवाह और रीगा के उपाध्यक्ष योगेंद्र सिंह, नरेंद्र कुमार सिंह व दिनानाथ महतो ने कहा कि खुदरा विक्रेता किसान और आपूर्ति श्रृंखला के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में उनका आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ रहा है।
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विक्रेता संघों ने सरकार और कृषि विभाग से मुख्य रूप से एफओआर (F.O.R.) व्यवस्था लागू करने और कंपनियों व थोक विक्रेताओं की ओर से की जाने वाली अनिवार्य टैगिंग व्यवस्था खत्म करने की मांग की है। उनका कहना है कि एफओआर व्यवस्था लागू होने से परिवहन और आपूर्ति का अतिरिक्त खर्च कम होगा। वहीं, टैगिंग व्यवस्था समाप्त होने से विक्रेताओं को क्षेत्रीय मांग और अपनी जरूरत के अनुसार पारदर्शी तरीके से किसी भी कंपनी से खाद खरीदने की स्वतंत्रता मिलेगी।
संघ ने निर्धारित बिक्री मूल्य के आधार पर विक्रेताओं के लिए उचित और व्यावहारिक मार्जिन तय करने की भी मांग की है, ताकि व्यापार संचालन में उन्हें नुकसान न उठाना पड़े। विक्रेताओं ने स्पष्ट किया कि खाद का उठाव रोकने का निर्णय किसानों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए लिया गया है। उनका कहना है कि यदि खरीद और बिक्री दर के बीच अंतर बना रहा तो छोटे दुकानदारों का कारोबार बंद हो सकता है, जिसका असर भविष्य में स्थानीय स्तर पर खाद की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है।
विक्रेताओं ने जिला कृषि पदाधिकारी और विभागीय अधिकारियों से तत्काल पहल कर वार्ता के जरिए समस्या का समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक खाद का उठाव रोकने का निर्णय जारी रहेगा।