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बिहार: मेडिकल जांच में शुक्राणु न मिलना दुष्कर्म न होने का सबूत नहीं, हाईकोर्ट ने सजा रखी कायम

Wed, 23 Sep 2026 07:30 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: शबाहत हुसैन Updated Wed, 23 Sep 2026 07:30 PM IST
सार

न्यायालय ने दरभंगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि उक्त जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर तीन महीने में रिपोर्ट अदालत को सौंपें। इसके अतिरिक्त बिहार पीड़ित मुआवजा योजना के तहत पीड़िता को 30 दिनों के भीतर 6 लाख रुपये की सहायता राशि देने का आदेश दिया गया है।

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Bihar Case: Absence of Sperm in Medical Test Does Not Rule Out Assault Patna High Court
पटना हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पटना उच्च न्यायालय ने दरभंगा जिले में आठ वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपी बमबम मुखिया की ताउम्र कैद की सजा को बरकरार रखा है। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि चिकित्सीय जांच में शुक्राणु न मिलना दुष्कर्म की वारदात न होने का सबूत नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी और न्यायमूर्ति राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने दोषी की ओर से दायर आपराधिक अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत का फैसला बनाए रखा।

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दोषी किसी राहत का हकदार नहीं
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता के बयानों में मामूली उतार-चढ़ाव या समय के फेरबदल से मूल अपराध की गंभीरता कम नहीं हो जाती। अदालत ने रेखांकित किया कि ऐसे जघन्य अपराधों को अंजाम देने वाला दोषी किसी भी तरह की राहत का हकदार नहीं होता। दरभंगा के पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(आई) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत दोषी ठहराया था। उच्च न्यायालय ने पॉक्सो अदालत के उस फैसले को पूरी तरह सही माना और दोषी को दी गई ताउम्र कैद व 30,000 रुपये के जुर्माने की सजा को यथावत रखा।
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वर्ष 2017 की वीभत्स वारदात
यह जघन्य मामला 1 और 2 मई, 2017 की मध्यरात्रि का है। पीड़िता की मां किसी काम से झंझारपुर गई हुई थी, जिससे घर में आठ वर्षीय पीड़िता और उसका पांच वर्षीय छोटा भाई अकेले थे। रात करीब 3:00 बजे पड़ोसी बमबम मुखिया ने घर में अनधिकृत प्रवेश किया और बच्ची का मुंह दबाकर उसके साथ दरिंदगी की। इस दरिंदगी के कारण बच्ची को अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। बच्ची की चीख-पुकार सुनकर उसकी चाची रामदई देवी मौके पर पहुंचीं तो आरोपी वहां से फरार हो गया। पीड़िता को तुरंत इलाज के लिए दरभंगा के डीएमसीएच में भर्ती कराया गया। इसके बाद 2 मई को महिला थाने में मामला दर्ज हुआ। पॉक्सो न्यायालय ने 28 सितंबर, 2018 को सुनवाई पूरी कर दोषी को सजा सुनाई थी।

जांच में लापरवाही पर कार्रवाई
उच्च न्यायालय ने इस मामले की जांच में घोर लापरवाही बरतने पर दरभंगा महिला थाना की तत्कालीन जांच अधिकारी नीलम कुमारी के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी ने घटनास्थल का नक्शा तैयार नहीं किया, स्वतंत्र गवाहों से पूछताछ नहीं की और आरोपी का चिकित्सीय परीक्षण भी नहीं कराया। पीठ ने स्पष्ट किया कि पुलिस की नाकारा जांच के कारण किसी दोषी को बरी नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने दरभंगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि उक्त जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर तीन महीने में रिपोर्ट अदालत को सौंपें। इसके अतिरिक्त बिहार पीड़ित मुआवजा योजना के तहत पीड़िता को 30 दिनों के भीतर 6 लाख रुपये की सहायता राशि देने का आदेश दिया गया है।

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