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Bihar : विवादित बयान मामले में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को मिली राहत; कोर्ट ने दी जमानत, हाजिरी से छूट
Mon, 01 Jun 2026 08:22 AM IST
Krishan Ballabh Narayan
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: Krishan Ballabh Narayan
Updated Mon, 01 Jun 2026 08:22 AM IST
सार
Bihar : फायरब्रांड और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की कोर्ट में आज पेशी है। लेकिन इस दौरान एक हैरान करने वाला मामला भी सामने आया। कोर्ट के फाइल से आरोप पत्र की मूल कॉपी ही गायब हो गई। अब मामला भी जानिए।
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केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को वर्ष 2019 के एक मामले में बड़ी राहत मिली है। बेगूसराय की एमपीएमएलए कोर्ट ने आरोप पत्र दाखिल होने के बाद उन्हें नियमित जमानत दे दी है। इसके साथ ही अदालत ने गिरिराज सिंह के वकील की उस याचिका को भी स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने मंत्री को कोर्ट में नियमित रूप से उपस्थित होने से छूट देने की मांग की थी।
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चार्जशीट की फोटोकॉपी दाखिल करने पर उठे सवाल
गिरिराज सिंह के बचाव पक्ष के वकील अमरेंद्र कुमार अमर ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि नगर थाना पुलिस ने इस संवेदनशील मामले में बड़ी लापरवाही बरती है। नियमानुसार, जांच के बाद कोर्ट में आरोप पत्र की मूल प्रति दाखिल करनी होती है, लेकिन पुलिस ने इसमें भारी गड़बड़ी कर दी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने कोर्ट को मूल डायरी नहीं सौंपी। कोर्ट में दाखिल की गई 20 पन्नों की चार्जशीट में से सिर्फ 3 पन्ने ही मूल हैं, जबकि शेष 17 पन्ने फोटोकॉपी हैं। यही नहीं, मामले से जुड़ी जब्ती सूची भी गायब है। अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने बताया कि इस लापरवाही को लेकर पहले भी एसपी और डीआईजी के माध्यम से नगर थाना पुलिस से जवाब-तलब किया जा चुका है।
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अमित शाह की मौजूदगी में दिया था तीन हाथ जमीन वाला बयान
यह पूरा मामला साल 2019 के लोकसभा चुनाव का है। बेगूसराय के जीडी कॉलेज मैदान में एक चुनावी सभा आयोजित की गई थी, जिसमें मंच पर देश के गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। इसी मंच से गिरिराज सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के उम्मीदवार तनवीर हसन और सीपीआई उम्मीदवार कन्हैया कुमार पर निशाना साधते हुए एक विवादित टिप्पणी की थी। अपने बयान में गिरिराज सिंह ने कहा था कि वे वंदे मातरम नहीं कह सकते, भारत की भूमि को नमन नहीं कर सकते। हमारे बाप-दादा तो सिमरिया में गंगा किनारे मरे, वहीं उनका दाह-संस्कार किया गया; लेकिन उस जमीन पर कोई कब्र नहीं बनाई गई। जबकि, ऊपर कुर्ता और नीचे पजामा पहनने वालों को तो मरने के बाद भी तीन हाथ जमीन की जरूरत होती है।
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कोर्ट परिसर में जुटे समर्थक
मंगलवार को कोर्ट की इस कार्यवाही के दौरान बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी के समर्थक, कई वकील और मीडियाकर्मी मौजूद रहे। नियमित जमानत मिलने और कोर्ट में बार-बार पेशी से राहत मिलने के बाद समर्थकों ने खुशी जताई है।