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World Environment Day 2025: हरियाली के मसीहा सूर्यदेव पासवान, हाथ कटने के बावजूद 1.5 किमी में लगाए हजारों पेड़
Thu, 05 Jun 2025 09:26 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,औरंगाबाद
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Thu, 05 Jun 2025 09:26 PM IST
सार
बिहार के औरंगाबाद के सूर्यदेव पासवान ने अपने एक हाथ कटे होने के बावजूद 1.5 किलोमीटर में 5000 से अधिक पेड़ लगाकर ग्रीन बेल्ट बनाया। जानिए उनकी मेहनत और पर्यावरण संरक्षण की अनमोल कहानी।
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सूर्यदेव पासवान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विश्व पर्यावरण दिवस पर आज हम जिस शख्स की कहानी साझा कर रहे हैं, वह न सिर्फ प्रेरणादायक है बल्कि एक गहरा संदेश भी देती है कि हौसले के सामने कोई कमजोरी मायने नहीं रखती। औरंगाबाद जिले के बारूण प्रखंड के पिपरा गांव के निवासी सूर्यदेव पासवान ने पर्यावरण संरक्षण की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
एक हथकटे बुजुर्ग की हरियाली की जिद
सूर्यदेव पासवान का एक हाथ सालों पहले चारा काटने की मशीन में कट गया था। लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जब खेती के दौरान उन्होंने और दूसरे किसानों ने तपती धूप में छांव की कमी को महसूस किया, तो उन्होंने खुद से यह संकल्प लिया कि वे राहगीरों और किसानों को छांव देने के लिए पेड़ लगाएंगे।
डेढ़ किलोमीटर की पगडंडी को बनाया हरा-भरा
सूर्यदेव पासवान ने पिपरा पंचायत मुख्यालय से आजाद बिगहा टोला तक लगभग 1.5 किमी लंबी पगडंडी के दोनों ओर वृक्षारोपण किया। यह काम उन्होंने करीब 15 साल पहले शुरू किया था। पहले एक-दो पेड़ लगाए, फिर यह एक अभियान बन गया। पांच साल तक उन्होंने खुद पेड़ों की देखरेख की। आज यह पगडंडी एक ग्रीन बेल्ट में तब्दील हो चुकी है।
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यह भी पढ़ें: पटना में छात्रों का प्रदर्शन, कहा- डोमिसाइल नीति लागू करे नीतीश सरकार, नहीं तो होगा वोट बहिष्कार
अब तक लगा चुके हैं 5 हजार से ज्यादा पेड़
सिर्फ डेढ़ किलोमीटर का रास्ता ही नहीं, बल्कि उसके बाद भी सूर्यदेव पासवान ने वृक्षारोपण जारी रखा। आज तक वे करीब 5,000 पेड़ लगा चुके हैं। उनका कहना है कि उन्हें कभी अपने अपंग होने का एहसास नहीं हुआ। यह उनका जुनून और समर्पण ही है जिसने इलाके को हराभरा बना दिया है।
गांववालों के लिए बने गर्व का कारण
स्थानीय निवासी राजेश यादव बताते हैं कि पहले इस रास्ते पर एकमात्र पीपल का पेड़ था, जहां मजदूर और किसान सुस्ताते थे। लेकिन अब पूरा रास्ता छायादार हो गया है। अब लोग वहां बैठकर सुकून महसूस करते हैं और गर्मी में राहत पाते हैं।
दूसरा दशरथ मांझी मानते हैं लोग
लोग सूर्यदेव पासवान की तुलना माउंटेनमैन दशरथ मांझी से करते हैं। जिस तरह दशरथ मांझी ने पत्नी के दर्द को देखकर पहाड़ काटकर सड़क बनाई थी, उसी तरह सूर्यदेव पासवान ने किसानों और राहगीरों की तकलीफ को समझते हुए हरियाली का रास्ता बना दिया। पिपरा पंचायत के लोग कहते हैं कि उन्हें सूर्यदेव पासवान पर गर्व है। वे उनके लंबे जीवन की कामना करते हैं ताकि वे और अधिक पेड़ लगा सकें और पर्यावरण को संवार सकें।
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एक हथकटे बुजुर्ग की हरियाली की जिद
सूर्यदेव पासवान का एक हाथ सालों पहले चारा काटने की मशीन में कट गया था। लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जब खेती के दौरान उन्होंने और दूसरे किसानों ने तपती धूप में छांव की कमी को महसूस किया, तो उन्होंने खुद से यह संकल्प लिया कि वे राहगीरों और किसानों को छांव देने के लिए पेड़ लगाएंगे।
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डेढ़ किलोमीटर की पगडंडी को बनाया हरा-भरा
सूर्यदेव पासवान ने पिपरा पंचायत मुख्यालय से आजाद बिगहा टोला तक लगभग 1.5 किमी लंबी पगडंडी के दोनों ओर वृक्षारोपण किया। यह काम उन्होंने करीब 15 साल पहले शुरू किया था। पहले एक-दो पेड़ लगाए, फिर यह एक अभियान बन गया। पांच साल तक उन्होंने खुद पेड़ों की देखरेख की। आज यह पगडंडी एक ग्रीन बेल्ट में तब्दील हो चुकी है।
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अब तक लगा चुके हैं 5 हजार से ज्यादा पेड़
सिर्फ डेढ़ किलोमीटर का रास्ता ही नहीं, बल्कि उसके बाद भी सूर्यदेव पासवान ने वृक्षारोपण जारी रखा। आज तक वे करीब 5,000 पेड़ लगा चुके हैं। उनका कहना है कि उन्हें कभी अपने अपंग होने का एहसास नहीं हुआ। यह उनका जुनून और समर्पण ही है जिसने इलाके को हराभरा बना दिया है।
गांववालों के लिए बने गर्व का कारण
स्थानीय निवासी राजेश यादव बताते हैं कि पहले इस रास्ते पर एकमात्र पीपल का पेड़ था, जहां मजदूर और किसान सुस्ताते थे। लेकिन अब पूरा रास्ता छायादार हो गया है। अब लोग वहां बैठकर सुकून महसूस करते हैं और गर्मी में राहत पाते हैं।
दूसरा दशरथ मांझी मानते हैं लोग
लोग सूर्यदेव पासवान की तुलना माउंटेनमैन दशरथ मांझी से करते हैं। जिस तरह दशरथ मांझी ने पत्नी के दर्द को देखकर पहाड़ काटकर सड़क बनाई थी, उसी तरह सूर्यदेव पासवान ने किसानों और राहगीरों की तकलीफ को समझते हुए हरियाली का रास्ता बना दिया। पिपरा पंचायत के लोग कहते हैं कि उन्हें सूर्यदेव पासवान पर गर्व है। वे उनके लंबे जीवन की कामना करते हैं ताकि वे और अधिक पेड़ लगा सकें और पर्यावरण को संवार सकें।