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Bihar: पीयूष बोरवेल हादसे के बाद भी सबक नहीं! DM के आदेश को ठेंगा दिखा रहा PHED, 30 फीट गहरा बोरवेल अब भी खुला

Mon, 20 Jul 2026 03:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 20 Jul 2026 03:10 PM IST
सार

गया में तीन वर्षीय पीयूष के बोरवेल रेस्क्यू के बाद भी प्रशासन के निर्देशों का असर नहीं दिख रहा। बांके बाजार के जमुआरा कला गांव में 30 फीट गहरा धंसा बोरिंग अब भी खुला पड़ा है। ग्रामीणों ने इसे बच्चों के लिए बड़ा खतरा बताते हुए तत्काल सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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Bihar 30-Foot Uncovered Borewell Ignored by PHED Despite DM Orders After Piyush Rescue
बोरिंग के पास बना बड़ा गढ्ढे - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

गया जिले में तीन वर्षीय पीयूष को खुले बोरवेल से सुरक्षित निकालने के बाद जिला प्रशासन ने सभी खुले बोरवेल और खतरनाक गड्ढों को तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि, इन आदेशों का असर जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहा है। बांके बाजार प्रखंड के जमुआरा कला गांव में पीएचईडी विभाग का करीब 30 फीट गहरा धंसा बोरिंग आज भी खुला पड़ा है, जो किसी बड़े हादसे को दावत दे रहा है।
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डीएम के निर्देश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
दो दिन पहले खुले बोरवेल में गिरे तीन वर्षीय पीयूष को सात घंटे लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया था। इस घटना के बाद जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने संबंधित विभागों को सभी खुले बोरवेल और खतरनाक गड्ढों को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जमुआरा कला गांव में पीएचईडी विभाग द्वारा कराया गया धंसा बोरिंग अब भी खुला पड़ा है।
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30 फीट धंसा बोरिंग बना खतरे का केंद्र
ग्रामीणों के अनुसार, पीएचईडी विभाग द्वारा कराए गए बोरिंग का लगभग 30 फीट हिस्सा धंस गया है। गड्ढा पूरी तरह खुला है और उसके आसपास न तो बैरिकेडिंग की गई है और न ही किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। ऐसे में यह स्थान ग्रामीणों, विशेषकर बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
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ग्रामीण बोले- विभाग ने मुड़कर भी नहीं देखा
स्थानीय ग्रामीण रविन्द्र पासवान ने बताया कि बोरिंग का कार्य पूरा होने के बाद विभाग के अधिकारी और कर्मचारी दोबारा गांव नहीं आए। धंसे हुए गड्ढे की सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे प्रतिदिन इसी स्थान के आसपास खेलते हैं और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

लापरवाही पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेता है। योजनाओं का उद्घाटन तो कर दिया जाता है, लेकिन उनकी निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती। लोगों का कहना है कि हाल की बोरवेल घटना से सबक लेने के बजाय संबंधित विभाग अब भी गंभीरता नहीं दिखा रहा है।


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जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि धंसे हुए बोरिंग को तत्काल सुरक्षित कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही किसी और मासूम की जान पर भारी पड़ सकती है।
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