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बिहार के छात्र कोटा में धरने पर बैठे, राज्य के 17 लाख से ज्यादा लोग दूसरे राज्यों में फंसे
Fri, 24 Apr 2020 01:25 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आसिम खान
Updated Fri, 24 Apr 2020 01:25 PM IST
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बिहार के छात्र कोटा में धरने पर बैठे
- फोटो : Twitter
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देश में लॉकडाउन के चलते बिहार के 17 लाख से ज्यादा लोग दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं। राज्य सरकार ने कहा है कि फिलहाल उन्हें वापस लाना मुमकिन नहीं है। बिहार के करीब 11 हजार छात्र और छात्राएं राजस्थान के कोटा में भी फंसे हैं। अब उन्होंने घर वापसी के लिए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
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छात्र गांधीवादी तरीके से कर रहे प्रदर्शन
बिहार सरकार से लगातार आग्रह करने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। छात्र हॉस्टल में रहकर ही उपवास कर रहे हैं और गांधीवादी तरीके से हाथ में तख्तियां लेकर राज्य सरकार से घर बुलवाने की अपील कर रहे हैं।
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छात्रों का कहना है कि जब तक उन्हें घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था नहीं होती है उनका उपवास जारी रहेगा। बच्चों के अलावा उनके परिजन भी लगातार राज्य सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि उन्हें कोटा से वापस लाने की व्यवस्था की जाए।
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कोटा में फंसे हैं कई राज्यों के लगभग 25 हजार छात्र
कोटा में बिहार समेत अन्य राज्यों के लगभग 22 से 25 हजार छात्र अभी भी फंसे हुए हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपील की है कि जिन राज्यों के छात्र अभी भी कोटा में फंसे हुए हैं उनकी सरकारें उन्हें घर पहुंचाने में सहयोग करें। इसको लेकर गहलोत सरकार बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सरकार से बात कर रही है।
राज्य के लोगों को अभी वापस नहीं ला सकते: बिहार सरकार
बिहार सरकार ने गुरुवार को हाईकोर्ट में जानकारी दी कि दूसरे राज्यों में फंसे राज्य के 17 लाख से ज्यादा लोगों को फिलहाल वापस नहीं ला सकते। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि उन लोगों को फौरी सहायता के तौर पर भोजन, राशन और रुपये दिए जा रहे हैं।
आपदा प्रबंधक विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने दूसरे राज्यों में फंसे बिहार के लोग और उनको प्रदेश सरकार द्वारा दी जा रही मदद के बारे में हाईकोर्ट के निबंधक कार्यालय को रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में बिहार सरकार ने बताया कि लॉकडाउन के नियमों और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। लॉकडाउन की अवधि में प्रदेश के किसी भी व्यक्ति को वापस नहीं लाया जा सकता। ऐसे लोगों को समुचित भोजन, राशन के साथ तत्काल एक-एक हजार रुपये दिए जा रहे हैं।
छात्रा के पिता ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
राज्य सरकार ने कहा कि टेलीफोन, हेल्पलाइन नंबर, मोबाइल एप बहुत पहले ही जारी कर दिए गए थे। दरअसल, कोटा में पढ़ रही बिहार की एक छात्रा के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि छात्रा को कोटा में रहने और खाने की परेशानी हो रही है।
लड़की के पिता ने याचिका में कहा है कि जिस तरह यूपी, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, पश्चिम बंगाल और असम की सरकारें कोटा में पढ़ने वाले अपने छात्रों को वापस लाई हैं उसी तरह बिहार सरकार भी अपने राज्य के छात्रों को वापस बुलाए। इसी पर हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से पांच दिन में जवाब मांगा है।