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Caste census: एनसीबीसी अध्यक्ष बोले- जाति आधारित जनगणना एक जायज मांग, बेहतर नीतियां बनाने में मिलेगी मदद
Fri, 26 Nov 2021 10:39 PM IST
Amit Mandal
पीटीआई, पटना
पीटीआई, पटना
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 26 Nov 2021 10:39 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कई राजनीतिक दलों ने इस तरह की जनगणना की मांग उठाई है।
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Census India
- फोटो : social media
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विस्तार
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) के अध्यक्ष डॉक्टर भगवान लाल सहनी ने कहा कि जाति आधारित जनगणना एक सही मांग है और इससे बेहतर नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने पटना में संवाददाताओं से कहा कि इस मांग को लेकर कई संगठनों ने उनसे मुलाकात की है और उन्होंने इस मामले से संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दिया है। अब सरकार को कार्रवाई करनी है।
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पिछड़ी जातियों के लिए नीतियां बनाना आसान होगा
सहनी ने कहा, जाति जनगणना निश्चित रूप से नीति निर्माताओं को पिछड़ी जातियों के लिए कल्याणकारी नीतियां बनाने में मदद करेगी। मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि अगर ऐसा किया जाता है, तो सरकार के लिए यह जानना आसान होगा कि कितने लोग किस जाति के हैं और उनके लिए क्या किया जाना चाहिए।
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जाति आधारित जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोगों की जानकारी ली जाएगी। सहनी ने कहा कि कई राजनीतिक दलों ने देश की आबादी की जातिगत गणना की मांग शुरू कर दी है।
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उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कई राजनीतिक दलों ने इस तरह की जनगणना की मांग उठाई है। देश में एकमात्र जाति आधारित जनगणना 1931 में हुई थी।