मेवालाल को शिक्षामंत्री बनाकर फंसे नीतीश कुमार, बिहार की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 19 Nov 2020 05:40 PM IST
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डॉ मेवालाल चौधरी (फाइल फोटो)
डॉ मेवालाल चौधरी (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

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बिहार में लगातार चौथी बार नीतीश कुमार की सरकार बनी, लेकिन शपथ ग्रहण के महज चार दिन बाद ही इस सरकार के दामन में दाग नजर आने लगे। अब इन दागों को धोने के चक्कर में शिक्षामंत्री मेवालाल को कार्यभार संभालने के महज दो घंटे बाद ही अपने पद से इस्तीफा देना पड़ गया। आखिर कौन हैं मेवालाल, जिनकी वजह से बिहार की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया? क्या इससे विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने वाले महागठबंधन को संजीवनी मिल गई है? इस रिपोर्ट में जानते हैं कि क्या वाकई मेवालाल को शिक्षामंत्री बनाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फंस गए हैं और बिहार की राजनीति पर इस पूरे मसले का क्या असर पड़ेगा?
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कौन हैं मेवालाल? 
बिहार के इस नए बवाल से रूबरू होने से पहले हम महज 2 घंटे कार्यभार संभालने वाले शिक्षामंत्री मेवालाल के बारे में जान और समझ लेते हैं। मेवालाल पेशे से शिक्षक थे और 2015 में पहली बार जदयू के टिकट पर विधायक बने। 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तारापुर विधानसभा सीट पर एक बार फिर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसी के साथ उनकी एंट्री नीतीश कैबिनेट में हो गई, लेकिन पठन-पाठन और राजनीति तक के सफर के दौरान मेवालाल के करियर पर आरोपों के कई दाग भी लगे। 


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इन आरोपों के चलते घिरे मेवालाल?
गौरतलब है कि मेवालाल चौधरी ने साल 2015 के दौरान राजनीति में कदम रखा। उससे पहले वह सबौर कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर थे। 2013-14 के दौरान उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जो सुशील मोदी ने लगाए थे। दरअसल, जब मेवालाल चौधरी वाइस चांसलर थे, उस दौरान सबौर कृषि विश्वविद्यालय में 281 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्तियां होनी थीं, जिनमें 161 लोगों को बहाली दी गई थी। आरोप है कि मेवालाल ने कम कम अंक वाले अभ्यर्थियों को पास कर दिया था, जबकि ज्यादा नंबर वाले अभ्यर्थी फेल हो गए थे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उस वक्त बिहार के राज्यपाल थे। उन्होंने इस मामले की जांच रिटायर्ड जज महफूज आलम से कराई, जिसके बाद इस मामले में 2017 के दौरान केस दर्ज हुआ था। इसके अलावा मेवालाल पर सबौर कृषि विश्वविद्यालय के भवन निर्माण में घपलेबाजी करने के भी आरोप हैं। 



राजद ने लगाया पत्नी की हत्या का आरोप
बता दें कि मेवालाल पर अपनी पत्नी नीता चौधरी की हत्या करने का भी आरोप है। दरअसल, नीता चौधरी 27 मई 2019 के दौरान अपने आवास में बुरी तरह जल गई थीं और 2 जून 2019 को उनकी मौत हो गई थी। राजद नेता तेजस्वी यादव नीता चौधरी की संदिग्ध मौत के मामले में मेवालाल की संलिप्तता को लेकर जांच की मांग कर चुके हैं। हालांकि, इस मामले में मेवालाल ने पलटवार भी किया। उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी की मौत के मामले में जिस तरीके से मुझ पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसको लेकर मैं तेजस्वी को कानूनी नोटिस भेजूंगा। साथ ही, 50 करोड़ का मानहानि का मुकदमा भी करूंगा।

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मेवालाल ने दी यह सफाई
मेवालाल चौधरी ने फिलहाल अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, लेकिन उन्होंने अपने ऊपर आरोपों को लेकर उन्होंने सफाई भी दी।  उन्होंने कहा कि कोई भी केस तब साबित होता है, जब आपके खिलाफ कोई चार्जशीट दर्ज हुई हो या कोर्ट ने कुछ फैसला दिया हो। न हमारे खिलाफ अभी कोई चार्जशीट दर्ज है और न ही हमारे ऊपर कोई आरोप दर्ज हुआ है।

मजबूरन देना पड़ा इस्तीफा
मेवालाल के मंत्रिमंडल में शामिल होते ही विपक्ष हमलावर हो गया। तेजस्वी यादव ने सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा। वहीं, लालू प्रसाद ने भी सुशासन बाबू और भाजपा की चुटकी ली, जिसके बाद इस मामले का असर बिहार से दिल्ली तक नजर आया। ऐसे में जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह और नीतीश कुमार ने मेवालाल चौधरी को बुलाकर समझाया। वहीं, दिल्ली दरबार ने भी नीतीश कुमार को साफ संदेश दे दिया कि सुशासन के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं। इसके चलते मेवालाल को इस्तीफा देना पड़ गया।

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बिहार की राजनीति में आया उबाल
मेवालाल के शपथ ग्रहण से बिहार में शुरू हुआ राजनीतिक घमासान उनके इस्तीफे के बाद भी थमता नजर नहीं आ रहा है। दरअसल, विधानसभा चुनाव में मिली हार का घाव सहला रहे महागठबंधन को एक तरह से संजीवनी मिल गई है और वह लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेर रहा है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने मेवालाल के इस्तीफे के बाद भी नीतीश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने अपने पहले ट्वीट में लिखा, ''माननीय मुख्यमंत्री जी, जनादेश के माध्यम से बिहार ने हमें एक आदेश दिया है कि आपकी भ्रष्ट नीति, नीयत और नियम के खिलाफ आपको आगाह करते रहें। महज एक इस्तीफे से बात नहीं बनेगी। अभी तो 19 लाख नौकरी, संविदा और समान काम-समान वेतन जैसे अनेकों जन सरोकार के मुद्दों पर मिलेंगे। जय बिहार, जय हिन्द।''

 


इसके बाद तेजस्वी यादव ने एक और ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा, ''मैंने कहा था न आप थक चुके हैं, इसलिए आपकी सोचने-समझने की शक्ति क्षीण हो चुकी है। जानबूझकर भ्रष्टाचारी को मंत्री बनाया। थू-थू के बावजूद पदभार ग्रहण कराया। घंटे बाद इस्तीफ़े का नाटक रचाया। असली गुनाहगार आप हैं। आपने मंत्री क्यों बनाया? आपका दोहरापन और नौटंकी अब चलने नहीं दी जाएगी?''

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