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Bihar: कर्तव्य पथ पर आकर्षण का केंद्र रहेगी बिहार की झांकी, भगवान बुद्ध और प्राचीन नालन्दा महाविहार होगा शामिल
Wed, 22 Jan 2025 10:30 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Wed, 22 Jan 2025 10:30 PM IST
सार
Republic Day 2025 : गणतंत्र दिवस के मौके पर इस बार दिल्ली के परेड में बिहार की झांकी आकर्षण का केंद्र रहेगा। कर्तव्य पथ पर निकलने वाले झांकी में भगवान बुद्ध और प्राचीन नालन्दा महाविहार के दृश्य को शामिल किया गया है।
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दिल्ली में दिखाई जाएगी भगवान बुद्ध की झांकी
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
इस साल दिल्ली में होने वाले गणतंत्र दिवस के मौके पर बिहार की झांकी में बिहार की समृद्ध ज्ञान एवं शांति की परंपरा को प्रदर्शित किया गया है। इस झांकी में शांति का संदेश देते भगवान बुद्ध को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें उनकी अलौकिक मूर्ति राजगीर स्थित घोड़ा कटोरा जलाशय में दिख रही है। इस अलौकिक मूर्ति को देखने के लिए प्रत्येक वर्ष लाखों लोग आते हैं। वर्ष 2018 में स्थापित एक ही पत्थर से बनी 70 फीट की भगवान बुद्ध की इस अलौकिक एवं भव्य मूर्ति के साथ घोड़ा कटोरा झील का विकास इको टूरिज्म के क्षेत्र में बिहार सरकार का अनूठा प्रयास है। झांकी के अग्र भाग में बोधिवृक्ष इस बात का संदेश दे रही है कि इसी धरती से ज्ञान का प्रकाश सम्पूर्ण विश्व में फैला है।
बिहार सरकार के द्वारा झांकी के माध्यम से ज्ञानभूमि नालन्दा की प्राचीन विरासत एवं उसके संरक्षण हेतु किए जा रहे राज्य सरकार के प्रयासों को दर्शाने की कोशिश की गयी है। साथ ही नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना के माध्यम से बिहार को पुनः शिक्षा के मानचित्र पर वैश्विक रूप में स्थापित करने के प्रयास को दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त भगवान बुद्ध की अलौकिक एवं भव्य मूर्ति के साथ घोड़ा कटोरा झील को इको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने के बिहार सरकार के अनूठे प्रयास को भी दर्शाया गया है।
प्राचीन काल से बिहार ज्ञान, मोक्ष एवं शांति की भूमि रही है। झांकी में शांति का संदेश देते भगवान बुद्ध को प्रदर्शित किया गया है। भगवान बुद्ध की यह अलौकिक मूर्ति राजगीर स्थित घोड़ा कटोरा जलाशय में अवस्थित है, जहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में सैलानी आते हैं। वर्ष 2018 में स्थापित एक ही पत्थर से बनी 70 फीट की भगवान बुद्ध की इस अलौकिक एवं भव्य मूर्ति के साथ घोड़ा कटोरा झील का विकंस इको टूरिज्म के क्षेत्र में बिहार सरकार का अनूठा प्रयास है। बिहार की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत अत्यन्त समृद्ध है। झांकी में प्राचीन नालन्दा महाविहार (विश्वविद्यालय) के भग्नावशेषों को भी दर्शाया गया है, जो इस बात के साक्षी हैं कि चीन, जापान एवं मध्य एशिया के सुदूरवर्ती देशों से छात्र यहां ज्ञान की प्राप्ति के लिए आते थे। नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष प्राचीन भारत की ज्ञान परंपरा के प्रतीक हैं।
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बिहार सरकार के द्वारा झांकी के माध्यम से ज्ञानभूमि नालन्दा की प्राचीन विरासत एवं उसके संरक्षण हेतु किए जा रहे राज्य सरकार के प्रयासों को दर्शाने की कोशिश की गयी है। साथ ही नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना के माध्यम से बिहार को पुनः शिक्षा के मानचित्र पर वैश्विक रूप में स्थापित करने के प्रयास को दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त भगवान बुद्ध की अलौकिक एवं भव्य मूर्ति के साथ घोड़ा कटोरा झील को इको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने के बिहार सरकार के अनूठे प्रयास को भी दर्शाया गया है।
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प्राचीन काल से बिहार ज्ञान, मोक्ष एवं शांति की भूमि रही है। झांकी में शांति का संदेश देते भगवान बुद्ध को प्रदर्शित किया गया है। भगवान बुद्ध की यह अलौकिक मूर्ति राजगीर स्थित घोड़ा कटोरा जलाशय में अवस्थित है, जहां प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में सैलानी आते हैं। वर्ष 2018 में स्थापित एक ही पत्थर से बनी 70 फीट की भगवान बुद्ध की इस अलौकिक एवं भव्य मूर्ति के साथ घोड़ा कटोरा झील का विकंस इको टूरिज्म के क्षेत्र में बिहार सरकार का अनूठा प्रयास है। बिहार की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत अत्यन्त समृद्ध है। झांकी में प्राचीन नालन्दा महाविहार (विश्वविद्यालय) के भग्नावशेषों को भी दर्शाया गया है, जो इस बात के साक्षी हैं कि चीन, जापान एवं मध्य एशिया के सुदूरवर्ती देशों से छात्र यहां ज्ञान की प्राप्ति के लिए आते थे। नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष प्राचीन भारत की ज्ञान परंपरा के प्रतीक हैं।
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