Bihar Government : लालू यादव की आग में नीतीश कुमार ने क्या डाल दिया! क्या होने वाला है बिहार में अब
Bihar News : पिछले साल जनवरी में बिहार की सत्ता बदली थी। माहौल था। अब भी बनाने का प्रयास है। लालू प्रसाद यादव से पूछा गया तो उन्होंने नीतीश कुमार के स्वागत की बात कही। लेकिन, सीएम ने तो लालू प्रसाद की इस आग पर पानी फेर दिया।
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बिहार की राजनीति में क्या चल रहा है, यह सवाल खूब उछल रहा है। तो, आज वह जवाब भी जान लीजिए। सबसे पहले यह जानिए कि राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अपने साथ आने पर स्वागत करने की बात कही। मीडिया ने यह बात नीतीश कुमार के सामने रखी तो जवाब मिला- आप क्या बात कर रहे हैंं! मतलब, इसका कोई अर्थ नहीं है। इधर, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड के कोटे से केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने एनडीए में सबकुछ सामान्य होने की बात कही। दरअसल, विपक्ष और सोशल मीडिया समेत सनसनी फैलाने वाले मीडिया संस्थान जो कह लें, एनडीए के अंदर की तैयारी खरमास के बाद की है। सरकार में अस्थिरता जैसा कुछ नहीं और वह सामने भी आएगा तो सीधे सीएम नीतीश कुमार के जरिए, जिसके आसार दूर-दूर तक नहीं हैं।
तो, क्या है खरमास बाद की तैयारी?
बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन खरमास के खत्म होने का इंतजार कर रहा है। मुख्यमंत्री चार जनवरी से फिर प्रगति यात्रा पर निकल रहे हैं, लेकिन मकर संक्रांति के भोज के बाद एनडीए सामूहिक यात्रा करने वाला है। पिछले दिनों एनडीए के सभी दलों के प्रमुख नेताओं ने एक साथ बैठक की थी। उस बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विशेष तौर पर अपने प्रतिनिधि भेजे थे। कुल मिलाकर यही बात वहां हुई कि 15 जनवरी से एनडीए के नेता सामूहिक रूप से राज्य के हर हिस्से में घूमकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की उपलब्धियों को जनता के बीच बताएं और आमजन की जरूरतों को चुनाव से पहले समझें। इस बैठक की रूपरेखा और इसके उद्देश्य को लेकर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक स्पष्टता है। मतलब, भाजपा के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को भी एक-एक लाइन का अपडेट है। अक्टूबर-नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव होना है और उसके पहले सरकार लगातार विपक्ष के तमाम आरोपों का जवाब लेकर जनता के बीच जाने वाली है।
परिस्थितियों को जोड़ने से संशय का माहौल
चाणक्य स्कूल ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं- "एनडीए में जहां खरमास बाद की तैयारी चल रही है, वहीं राज्य की राजनीति में कई तरह से संशय का माहौल तैयार किया गया है। सोशल मीडिया की राह पर मीडिया के जाने के कारण यह सब माहौल बना। नीतीश कुमार पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह के परिजनों को ढांढस बंधाने, इलाज कराने और कुछ नेताओं से मिलने दिल्ली गए तो हवा उड़ाई गई कि वह कांग्रेस के करीब जा रहे हैं। लौटे तो बताया जाने लगा कि भाजपा के दिग्गजों ने उन्हें भाव नहीं दिया, इसलिए अब वह फैसला करेंगे। नए राज्यपाल से मिलने गए तो कुछ जगह तो नीतीश कुमार के इस्तीफे और नई सरकार के पेशकश तक की बात चल गई। अब लालू प्रसाद ने आग में घी डाला कि वह उनका स्वागत करने को तैयार हैं, जबकि तेजस्वी यादव ही उनके लिए दरवाजा बंद करने की भी बात कह चुके हैं। नीतीश कुमार के तमाम सहयोगी ही नहीं, खुद नीतीश भी दर्जनों बार कह चुके हैं कि वह दोबारा गलती नहीं करेंगे। लेकिन, तारों को जोड़कर करंट बनाने की कोशिश है।"