Shardiya Navratri: 52 शक्ति पीठों में एक मां मंगला गौरी मंदिर, नवरात्रि में उमड़ती है भीड़; जानिए सब कुछ
Durga Puja: शारदीय नवरात्र में मां मंगला गौरी शक्ति पीठ में पूजा का खास महत्व है। बिहार के गया जिले भस्मकुट पर्वत पर स्थित मां मंगला गौरी पालन पीठ के रूप में विराजमान हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पूजा करने वाले किसी भी भक्त को मां मंगला खाली हाथ नहीं भेजती है।
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देशभर में शारदीय नवरात्रि उत्सव पूरे उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। नौ दिवसीय इस उत्सव के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार वह भगवान स्कंद की माता थीं।शारदीय नवरात्र में मां मंगला गौरी शक्ति पीठ में पूजा का खास महत्व है। बिहार के गया जिले भस्मकुट पर्वत पर स्थित मां मंगला गौरी पालन पीठ के रूप में विराजमान हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पूजा करने वाले किसी भी भक्त को मां मंगला खाली हाथ नहीं भेजती है। इस मंदिर में ऐसे तो सालों भर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। मां मंगलागौरी मंदिर में सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं की भीड़ हर मंगलवार को लगती है। परंतु, नवरात्रा के दौरान दिन भर काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। गया के भस्मकुट पर्वत पर माता सती का वक्ष स्थल गिरा था, जो मंगला गौरी मंदिर के गर्भ गृह में मौजूद है।
इस मंदिर का उल्लेख पद्म पुराण, वायु पुराण और अग्नि पुराण के साथ देवी भागवत पुराण और मार्कंडेय पुराण समेत अन्य ग्रंथों में किया गया है। जानकारों की मानें तो यह मंदिर 15वीं सदी का है। देवी सती का यह मंदिर 52 शक्ति पीठों में एक माना जाता है। जहां सती के शरीर का वक्ष स्थल थे। सच्चे मन से पूजा अर्चना करने वाले भक्तों का सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। यही कारण है कि मां मंगला गौरी को परोपकार की देवी के रूप में भी प्रसिद्ध है।
मंगलवार को होती है विशेष पूजा
पालन पीठ के रूप में विराजमान मां मंगला गौरी मंदिर में मंगलवार को विशेष पूजा की जाती है। पूजा के दौरान देवी सती मां मंगला को 16 प्रकार की चूड़ियां, सात तरह का फल और पांच प्रकार की मिठाई से भक्त पूजा करते हैं। शारदीय नवरात्र के दौरान भस्मकुट पर्वत पर विराजमान मां मंगला गौरी की पूजा के लिए देश के विभिन्न राज्यों से भक्त पहुंचते हैं। इस दौरान काफी संख्या में भक्तों की भीड़ जुटती है।
आदिकाल से स्थापित है मंदिर
पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक भगवान शिव जब सती की जला शरीर लेकर क्रोध में तीनों लोको का भ्रमण कर रहे थे। उसी समय भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए थे। उसी समय माता सती का स्तन गया के भस्मकुट पर्वत पर गिरा था। उसी दौरान यह स्थान पालन पीठ के रूप में विराजमान है। मां मंगलागौरी मंदिर के गर्भगृह में प्राचीन काल से अखंड ज्योति जल रहा है। यही कारण है कि माता सती के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है।