Bihar News: जीतन राम मांझी बोले- मेरा जन्म उस परिवार में हुआ, जहां बचपन में रामायण पढ़ने का मौका नहीं मिला
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि हम एक ऐसे घर में जन्म लिए थे, जहां लोग वास्तु और ज्योतिष में कोई भी विश्वाश नहीं करते थे। हमलोग झाड़, फूंक, ओझा-गुणी सब में विश्वास करते थे। अंधविश्वास काफी हावी हो गया था।
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"हम वैसे घर में जन्म लिए है, जहां के लोग डाक्टरों के पास नहीं जाते थे। हमलोग इलाज के लिए ओझा गुणी के माध्यम से इलाज कराते थे।" उक्त बातें रविवार गया जिले के मानपुर प्रखंड के एक निजी होटल में आयोजित वास्तु एवं ज्योतिष महासम्मेलन को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहीं। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसे घर में जन्म लिए थे, जहां लोग वास्तु और ज्योतिष में कोई भी विश्वाश नहीं करते थे। हमलोग झाड़, फूंक, ओझा-गुणी सब में विश्वास करते थे। अंधविश्वास काफी हावी हो गया था। जब हमलोगों की तबीयत खराब होने पर डॉक्टर के यहां नहीं जाते थे। हमलोग ओझा गुणी के पास जाकर इलाज करते थे।
हम रामलीला छिपकर देखा करते थे
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि हम उस परिवार में जन्म लिए है। जहां बचपन में रामायण पढ़ने का मौका नहीं मिला। लेकिन हम रामलीला छिपकर देखा करते थे। हम किसी के यहां मजदूर थे। डर से हम उनसे बोलकर रामलीला देखने नहीं जा सकते थे। मगर जब सब लोग सो जाते थे, तब हम छिप कर उस गांव में चले जाते थे। जहां रामलीला होता था। हमे रामलीला की एक बात याद है। उसी बात को हम आज तक याद रखे हुए है। रामलीला में कहा गया था कि मनुष्य का जो तन है, वह बहुत भाग्य से मिलता है। उस रामलीला से हमें समझ में बात आई कि हम यहां पर बहुत ही भाग्य से आए है। मनुष्य तन में आए है तो जरूर कोई बड़ा महत्व है। लोग कहते है कि हम नीची धर्म से है, अछूत धर्म में है। वहीं एक दोहा बोलते हुए कहा कि भगवान भी उसी को प्यार करते है, जो भगवान के बनाए हुए वस्तुओं से प्यार करता है।
जानिए, क्या है इस सम्मेलन का उद्देश्य
मालूम हो कि गया जिले में पहली बार अखिल भारतीय ज्योतिष संस्था व एस्ट्रोलाॅजिकल पाॅइंट के संयुक्त तत्वावधान में महासम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश भर के चार सौ से अधिक ज्योतिष, वास्तु एवं वैदिक विधा के मर्मज्ञ जुटें है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है कि आज के इस दौर में तेजी से बढ़ रहे मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को ज्योतिष और वस्तु द्वारा पहचान एवं कैसे इसका निदान किया जा सकता है। भारत एवं विदेशों से आए हुए विद्वान एवं वक्त ने इन विषय पर अपनी अपनी शोध परक को रखा।
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