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Bihar: NGO को ज्यादा ऑपरेशन करने थे, कराहती महिलाएं बोलीं- बिना बेहोश किए पेट काट दिया, हाथ-पैर पकड़ नस खींचीं
Thu, 17 Nov 2022 02:14 PM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खगड़िया/ पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खगड़िया/ पटना
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Thu, 17 Nov 2022 02:14 PM IST
सार
बिहार के खगड़िया में महिलाओं के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की बेरहमी सामने आई है। महिलाओं की दर्दनाक आपबीती सुनकर हर कोई हैरान है।
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बिहार में महिलाओं के साथ बेरहमी
- फोटो : ANI
विस्तार
“अंदर ले गए तो देखा, जिन दो महिलाओं का ऑपरेशन हो रहा है...चिल्ला रही थी। पूछा तो कहा कि वह नशा करती थीं, इसलिए दर्द हो रहा। जब मेरा ऑपरेशन करने आए तो हम पूछे कि सुई दीजिएगा न! डॉक्टर बोले कि बाद में देंगे। जब चीरने लगे तो दर्द करने लगा। हम चिल्लाने लगे। नस खींच रहा था। हम छटपटाने लगे, पैर-हाथ पटकने लगे तो चार आदमी मिलकर पकड़े। जब सब कुछ हो गया तो बाहर बेड पर लाते समय सुई दे दिया गया। उसके बाद कुछ याद नहीं।” बंध्याकरण कराने वाली महिलाएं रोते हुए बता रहीं कि ऐसे हो रहा है बिहार में ऑपरेशन। किसी एक का नहीं, एकमुश्त ढेरी सारी महिलाओं का।
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बंध्याकरण का लक्ष्य हासिल करने भी भागमभाग में जिन एनजीओ को ऐसे अवसर दिए गए हैं, उनमें से एक ग्लोबल डेवलपमेंट इनीशियएटिव की टीम ने मंगलवार को ऐसे ऑपरेशन खगड़िया जिला स्थित अलौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में किए। दूर-देहात की यह खबर बुधवार को वायरल हुई, लेकिन पुष्टि नहीं हो सकी। खगड़िया के सिविल सर्जन ने भी ऐसी जानकारी मिलने की बात कही, लेकिन जांच के पहले कुछ बताने से इनकार किया।
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सरकारी सिस्टम घटना की जांच में अब भी ढीला
सिविल सर्जन ने मीडिया से सिर्फ इतना कहा कि जांच के बाद ही बता सकेंगे कि ऐसा हुआ या नहीं, लेकिन यह जरूर है कि हुआ होगा तो यह गलत है। अमर उजाला ने राज्य स्वास्थ्य समिति की परिवार नियोजन शाखा के प्रमुख डॉ. मो. सज्जाद अहमद से गुरुवार दोपहर बात की तो उन्होंने कहा कि आज ही सुबह पता चला है और एनजीओ ने प्राथमिक तौर पर पूछताछ में बताया है कि लोकल एनेस्थीशिया दिया था, लेकिन शायद प्रभावी नहीं होने के कारण कुछ महिलाओं को परेशानी हुई। उन्होंने पूरी जांच के लिए दो दिन का समय मांगते हुए कहा कि अभी पक्के तौर पर कुछ नहीं बता सकते। उन्होंने कहा कि सुदूर क्षेत्रों में जहां सरकारी संसाधन कम हैं या डॉक्टरों की कमी के कारण बंध्याकरण अभियान की गति ठीक नहीं है, वहां काम करने के लिए सरकार ने कुछ एनजीओ को अनुमति दी है। अनुमति के साथ सारे मापदंड भी दिए गए हैं, अगर अनुपालन नहीं किया गया हो तो कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
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महिलाएं बोलीं- होश में किया ऑपरेशन, सुई नहीं लगाई
मौके पर मौजूद ग्लोबल डेवलपमेंट के ओटी असिस्टेंट अमित ने कहा कि अंदर में ऑपरेशन के पहले डॉक्टर ने एनेस्थीशिया की सुई थी थी, जबकि महिलाओं ने कहा कि उन्हें पहली सुई ही ऑपरेशन के बाद निकलने पर दी गई। यहां तक कि कई महिलाओं ने कैमरे के सामने यह भी कहा कि उन्हें पता था कि ऐसे ही ऑपरेशन करेंगे, दर्द का अंदाजा करते हुए ही आए थे। महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि ऑपरेशन के पहले किसी तरह की सुई नहीं दी गई और रोते-चिल्लाते-कराहते हुए पूरे होश में ऑपरेशन किया गया।
सिविल सर्जन ने दी सफाई
दूसरी तरफ, सिविल सर्जन अमर कांत झा का कहना है कि इसमें छोटा-सा चीरा लगता है। लोकल एनेस्थीशिया के लिए सरकार का ही निर्देश है। जनरल एनेस्थीशिया में ऑपरेशन नहीं करने का निर्देश है। लोकल में एक से डेढ़ घंटे पहले नींद की सुई देने का प्रावधान है। जब रोगी अर्धमूर्छित हो जाए तो ऑपरेशन के लिए ले जाया जाता है। वहां निश्चेतना के लिए स्किन पर क्रीम लगाकर काम किया जाता है। जनरल एनेस्थीशिया में सांस रुकने समेत कई समस्याएं आती हैं और इसके लिए एनेस्थीशिया एक्सपर्ट की जरूरत होती है। एक्सपर्ट का घोर अभाव है। वैसे, अगर इस केस में प्रावधानों के तहत बगैर नींद की सुई दिए और मरीज के दर्द के बावजूद बंध्याकरण किया गया है तो यह निंदनीय है। हम इसकी जांच करेंगे। संबंधित पीएचसी प्रभारी से जानकारी मांगी गई है।