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Bihar: पुराने समीकरणों के सहारे लड़ाई, एनडीए का ईबीसी, ओबीसी और अगड़ा तो महागठबंधन का मुस्लिम-यादव पर ही जोर
Sun, 26 Oct 2025 06:52 AM IST
लव गौर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला
Published by: लव गौर
Updated Sun, 26 Oct 2025 06:52 AM IST
सार
बिहार के महासमर में दोनों प्रमुख गठबंधन नए विचार और नए मुद्दों के साथ जरूर सामने आए हैं, मगर टिकट वितरण में दोनों का जोर पुराने जातीय समीकरण पर ही रहा है। पुराने समीकरणों में नई जातियों को दोनों महागठबंधनों ने प्राथमिकता दी है।
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विस्तार
बिहार के महासमर में दोनों प्रमुख गठबंधन नए विचार और नए मुद्दों के साथ जरूर सामने आए हैं, मगर टिकट वितरण में दोनों का जोर पुराने जातीय समीकरण पर ही रहा। एनडीए ने पहले की तरह सवर्ण, अत्यंत पिछड़ा और अन्य पिछड़ा वर्ग पर फोकस रखा, तो महागठबंधन ने मुस्लिम-यादव समीकरण पर। बदली परिस्थितियों में दोनों गठबंधनों ने एक-दूसरे के गढ़ में सेंध लगाने के लिए कुछ विशेष जातियों को जरूर प्राथमिकता दी है। मसलन विपक्षी महागठबंधन ने एनडीए के महिला वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है, तो सत्तारूढ़ एनडीए ने गैरयादव ओबीसी-ईबीसी को भी प्राथमिकता दी है।
एनडीए में भाजपा का मुख्य फोकस पहले की तरह अगड़ा वर्ग है। दूसरी वरीयता ईबीसी और ओबीसी है। 2020 के चुनाव में भाजपा ने अगड़े वर्ग के 52 उम्मीदवारों को मौका दिया था, इस बार यह संख्या 49 है। पार्टी ने ओबीसी-ईबीसी को अवसर दिया है, मगर यादव प्रत्याशियों की संख्या 16 से घटाकर 6 कर दी है। ओबीसी में टिकट पाने वालों में 5 कुशवाहा, दो कुर्मी और पांच वैश्य हैं, जबकि ईबीसी में पार्टी की प्राथमिकता कुशवाहा हैं, जिन्हें पांच टिकट दिए गए हैं।
जदयू ने आधे से ज्यादा टिकट ओबीसी-ईबीसी को दिए
भाजपा की सहयोगी जदयू ने पहले की तरह ओबीसी-ईबीसी पर दांव लगाया है। पार्टी ने आधे से ज्यादा 59 टिकट इन्हीं वर्गों के नाम किए हैं। इनमें ओबीसी के 37 और ईबीसी के 22 उम्मीदवार हैं। पार्टी ने लवकुश वोट बैंक को जोड़े रखने के लिए दो बिरादरी को 25 टिकट दिए हैं। नई परिस्थितियों में पार्टी का यादव और मुसलमानों पर भरोसा घटा है। पिछली बार के 11 की जगह इस बार सिर्फ चार मुसलमानों को टिकट दिया है। पार्टी ने पिछले चुनाव की तरह इस बार भी 42 अगड़ा वर्ग के उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है।
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महागठबंधन में 75 यादवों को टिकट
पुराने समीकरणों पर ही भरोसा जताते हुए विपक्षी महागठबंधन ने इस बार भी एमवाई समीकरण पर भरोसा जताया है। राजद ने 51 यादव तो कांग्रेस ने 5 यादवों पर भरोसा जताया है। सारे सहयोगी को जोड़ दें तो यह संख्या 75 है।
इसी प्रकार राजद ने 19, कांग्रेस ने 10 और अन्य सहयोगियों ने इस वर्ग को तीन टिकट दिए हैं। इस प्रकार महागठबंधन ने अपनी आधी सीटें इसी समीकरण के नाम की हैं। हां, राजद ने 24 महिला और 13 कुशवाहा उम्मीदवार उतार कर जदयू के महिला और लवकुश वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश जरूर की है।
दोनों गठबंधन के अगुआ भाजपा और राजद ने दूसरे के गठबंधन में सेंधमारी का जिम्मा सहयोगियों को दिया है। भाजपा ने यादव को प्रतीकात्मक तो मुसलमानों को शून्य प्रतिनिधित्व दिया है। हालांकि जदयू ने यादव को 8, मुस्लिमों को 4 टिकट दिए हैं। राजद ने सामान्य वर्ग के 14, जबकि दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी कांग्रेस ने 21 अगड़ा उम्मीदवार पर भरोसा जताया है।
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एनडीए में भाजपा का मुख्य फोकस पहले की तरह अगड़ा वर्ग है। दूसरी वरीयता ईबीसी और ओबीसी है। 2020 के चुनाव में भाजपा ने अगड़े वर्ग के 52 उम्मीदवारों को मौका दिया था, इस बार यह संख्या 49 है। पार्टी ने ओबीसी-ईबीसी को अवसर दिया है, मगर यादव प्रत्याशियों की संख्या 16 से घटाकर 6 कर दी है। ओबीसी में टिकट पाने वालों में 5 कुशवाहा, दो कुर्मी और पांच वैश्य हैं, जबकि ईबीसी में पार्टी की प्राथमिकता कुशवाहा हैं, जिन्हें पांच टिकट दिए गए हैं।
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जदयू ने आधे से ज्यादा टिकट ओबीसी-ईबीसी को दिए
भाजपा की सहयोगी जदयू ने पहले की तरह ओबीसी-ईबीसी पर दांव लगाया है। पार्टी ने आधे से ज्यादा 59 टिकट इन्हीं वर्गों के नाम किए हैं। इनमें ओबीसी के 37 और ईबीसी के 22 उम्मीदवार हैं। पार्टी ने लवकुश वोट बैंक को जोड़े रखने के लिए दो बिरादरी को 25 टिकट दिए हैं। नई परिस्थितियों में पार्टी का यादव और मुसलमानों पर भरोसा घटा है। पिछली बार के 11 की जगह इस बार सिर्फ चार मुसलमानों को टिकट दिया है। पार्टी ने पिछले चुनाव की तरह इस बार भी 42 अगड़ा वर्ग के उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है।
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महागठबंधन में 75 यादवों को टिकट
पुराने समीकरणों पर ही भरोसा जताते हुए विपक्षी महागठबंधन ने इस बार भी एमवाई समीकरण पर भरोसा जताया है। राजद ने 51 यादव तो कांग्रेस ने 5 यादवों पर भरोसा जताया है। सारे सहयोगी को जोड़ दें तो यह संख्या 75 है।
इसी प्रकार राजद ने 19, कांग्रेस ने 10 और अन्य सहयोगियों ने इस वर्ग को तीन टिकट दिए हैं। इस प्रकार महागठबंधन ने अपनी आधी सीटें इसी समीकरण के नाम की हैं। हां, राजद ने 24 महिला और 13 कुशवाहा उम्मीदवार उतार कर जदयू के महिला और लवकुश वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश जरूर की है।
दोनों गठबंधन के अगुआ भाजपा और राजद ने दूसरे के गठबंधन में सेंधमारी का जिम्मा सहयोगियों को दिया है। भाजपा ने यादव को प्रतीकात्मक तो मुसलमानों को शून्य प्रतिनिधित्व दिया है। हालांकि जदयू ने यादव को 8, मुस्लिमों को 4 टिकट दिए हैं। राजद ने सामान्य वर्ग के 14, जबकि दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी कांग्रेस ने 21 अगड़ा उम्मीदवार पर भरोसा जताया है।