तो क्या इस तरह से हो पाएगी बिहार में शराब बंदी?
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बिहार में सरकार के गठन के कुछ दिनों बाद ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराब बंदी की घोषणा कर दी थी। जिसके कुछ दिनों बाद ही यह बात सामने आई कि यह घोषणा केवल देशी शराब के लिए थी।
बिहार की नई आबकारी नीति से ऐसा लग रहा है कि सरकार खुद शराब बेचने की ओर है। अगले वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई आबकारी नीति के संबंध में उत्पाद और मद्य निषेध विभाग ने नई उत्पादन नीति बनाई है जिसे विभाग ने आबकारी नीति -2015 नाम दिया है।
इस नीति के अंतर्गत प्रदेश में देशी शराब के निर्माण और खरीद-बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा लेकिन शहर के इलाकों में बिक्री नियंत्रित की जाएगी।
इन विदेशी शराबों को बेचने की जिम्मेदारी बिहार सरकार की अपनी एजेंसी बिहार स्टेट बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएसबीसीएल) खुद लेगा और शहरी इलाकों में उसकी खुद की दुकानें होंगी।
इन चीजों के लिए मांगी गई हैं निविदाएं
इस नई आबकारी नीति को विभाग ने जहां अंतिम रूप दे दिया है वहीं इसे आगामी 24 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के सामने लाया जाएगा।
बीएसबीसीएल ने दुकाने और गोदाम खोलने के लिए कैमरे, सिक्योरिटी गार्ड, फोर्थ क्लास स्टाफ, टेबल, कुर्सी, मेज और कई अन्य चीजों के लिए निविदाएं मंगाई गई है।
सी के साथ इस नई नीति के तहत यह भी तय किया गया है कि बीएसबीसीएल प्रदेश के किस जिले में कितनी दुकानें खोलेगा, उसी को ध्यान में रखकर दुकानों और गोदाम के लिए जमीन उपलब्ध के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
सूत्रों की माने तो 'आबकारी विभाग शराब बंदी के पहले चरण में देशी शराब को पूर्ण तरह से बैन लगाया जाएगा'।