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Bihar Election Result: नीतीश को झटका, तीन बड़े मंत्री हारे, 28 सीटों का हुआ नुकसान

Wed, 11 Nov 2020 04:31 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, पटना
एजेंसी, पटना Published by: देव कश्यप Updated Wed, 11 Nov 2020 04:31 AM IST
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Bihar Election Result 2020 Seat Wise News: Nitish Kumar three Ministers loses seat, Congress narrowed even after fighting in more seats
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

बिहार चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बड़ा झटका लगा है। एक तरफ जहां इस चुनाव में उन्हें 28 सीटों का नुकसान हुआ है वहीं दूसरी तरफर सरकार में शामिल तीन मंत्री बुरी तरह से पराजित हुए हैं। हारने वाले कद्दावर चेहरों में शहरी विकास मंत्री सुरेश शर्मा, समाज कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह और शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा शामिल हैं।

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मुजफ्फरपुर विधानसभा सीट पर सुरेश कुमार शर्मा को कांग्रेस उम्मीदवार विजेंद्र चौधरी ने छह हजार मतों से हराया। वहीं, रामसेवक सिंह हथुआ से चुनाव हार गए। राजद उम्मीदवार राजेश कुमार ने रामसेवक को करारी शिकस्त दी। जदयू नेता और बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन वर्मा को राजद उम्मीदवार सुदय यादव ने हराया है। चुनाव से पहले भी वर्मा को टिकट दिए जाने का विरोध हुआ था। बताते हैं कि बिहार का शिक्षक वर्ग उनसे काफी नाराज था।
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बिहार में ज्यादा सीटों पर लड़कर भी पहले से कम सीटों पर सिमटी कांग्रेस
बिहार विधानसभा चुनाव और कई राज्यों में उपचुनाव में भी कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं लगा। बिहार में इस बार ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद भी कांग्रेस उतनी सीट नहीं ला पाई, जितनी पिछली बार मिली थी। वहीं, मध्यप्रदेश उपचुनाव में भी जीती हुई सीटों पर भी उसे हार झेलनी पड़ी। उत्तर प्रदेश उपचुनाव में प्रियंका गांधी का जादू भी नहीं चला, तो गुजरात और तेलंगाना में पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई।
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पिछली बार बिहार चुनाव में कांग्रेस ने 40 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे 27 सीटों पर जीत मिली थी। इस बार पार्टी ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे 19 सीटें मिली। बिहार में टिकट बंटवारे के साथ ही स्थानीय नेताओं पर टिकट बेचने के आरोप लगने के बाद पार्टी ने चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी राज्य के बाहर के नेता को सौंपी थी। बिहार चुनाव के साथ ही यह साबित हुआ है कि जमीन पर कांग्रेस कहीं नहीं है। राजद के साथ गठबंधन के चलते स्थानीय समीकरण में उसे इन सीटों पर बढ़त मिली।

यूपी में कांग्रेस छह सीटों पर तीसरे और चौथे स्थान से आगे नहीं बढ़ सकी। पार्टी महासचिव और यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी के लिए चुनाव नतीजे उनके फैसलों की समीक्षा करने को बाध्य करेंगे। मध्यप्रदेश में अपने विधेयकों की बगावत के बाद उपचुनाव का फायदा भी कांग्रेस नहीं उठा पाई। जिन सीटों पर पिछले चुनाव में मतदाताओं ने कांग्रेस का साथ दिया था, भाजपा उन्हीं चेहरों को आगे कर मैदान में उतरी और जीती।

नतीजों में देरी की वजह: 63 फीसदी ज्यादा ईवीएम का इस्तेमाल
बिहार विधानसभा चुनाव कोरोना महामारी के दौर में भारत में होने वाले पहले विधानसभा चुनाव थे। चुनाव आयोग ने महामारी के दौरान बचाव के लिए जो भी कदम उठाए थे, उनके लिए अलग से गाइडलाइन जारी की थी। दरअसल, कोरोना महामारी के दौर में हुए इस पहले चुनाव में उन्हें पोलिंग बूथ की संख्या बढ़ानी पड़ी थी। इस बार 2015 के मुकाबले 63 फीसदी से ज्यादा पोलिंग बूथ बने थे। इसकी वजह से ईवीएम की संख्या भी बढ़ी थी।


जानकारी के मुताबिक, इन चुनावों में 63 फीसदी ज्यादा ईवीएम का इस्तेमाल हुआ है। इसके अलावा कोरोना महामारी के नियमों का पालन भी देरी की वजह बना। पहले हर पोलिंग बूथ पर 1500 लोगों को वोट डालने की इजाजत होती थी, जो इस बार के चुनाव में घटाकर 1000 लोगों के लिए ही कर दिया गया था। मतगणना हॉल में पहले जहां 14 टेबल होती थी, इस बार वहां केवल सात टेबल की इजाजत दी गई, ताकि सामाजिक दूरी का ख्याल रखा जा सके।





 

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