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भाजपा के गढ़ बांकीपुर में लव सिन्हा की दावेदारी से मुकाबला हुआ दिलचस्प

Sat, 31 Oct 2020 12:43 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 31 Oct 2020 12:43 AM IST
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bihar election, curiosity increased as luv sinha fights in BJP bastion
Luv Sinha

भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर मौजूदा पार्टी विधायक को लगातार तीसरी बार जीतने से रोकने के लिए कांग्रेस ने अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

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शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के टिकट पर पिछले साल पटना साहिब सीट से लोकसभा चुनाव लड़े थे, जिसमें उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। कांग्रेस ने बांकीपुर सीट के 37 वर्षीय लव सिन्हा को उम्मीदवार बनाकर मतदाताओं को हैरानी में डाल दिया है। बिहार की राजधानी पटना का बड़ा हिस्सा बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र में आता है। इस संसदीय सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा 2009 और 2014 में भाजपा के टिकट पर निर्वाचित हुए थे। बिहारी बाबू के नाम से जाने जाने वाले शत्रुघ्न सिन्हा ने 2014 में ‘मोदी लहर के बीच सबसे बड़े अंतर से जीत हासिल की थी, लेकिन उन्हें पिछले साल अपने पूर्व कैबिनेट सहयोगी एवं पहली बार चुनाव लड़ रहे भाजपा के रवि शंकर प्रसाद के हाथों से इससे भी अधिक अंतर से करारी शिकस्त मिली थी।
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शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे की राजनीतिक क्षमता के बारे में अभी अधिक जानकारी नहीं है। ऐसा बताया जाता है कि लव ने अभिनय में रुचि दिखाई थी, लेकिन वह शत्रुघ्न या अपनी बहन सोनाक्षी की तरह फिल्म जगत में अपनी जगह नहीं बना पाए। लव सिन्हा के पिता की भीड़ को खींचने की क्षमता के अलावा बांकीपुर में जातीय समीकरण भी लव सिन्हा के पक्ष में प्रतीत होता है, जहां विजेता और उपविजेता कायस्थ ही रहे हैं। हालांकि उनके लिए निवर्तमान विधायक नितिन नवीन को हराना आसान नहीं होगा।
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40 वर्षीय विधायक नितिन नवीन ने अब समाप्त हो चुकी पटना पश्चिम सीट से 2006 में उपचुनाव के साथ पदार्पण किया था। उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा के निधन के बाद इस सीट पर चुनाव कराया गया था। नितिन नवीन हमेशा बड़े अंतर से जीत दर्ज करते रहे हैं। नीतीश कुमार की राजग में वापसी से भाजपा को चुनाव में मदद मिलने की उम्मीद है। नवीन ने भारतीय जनता युवा मोर्चा की राज्य इकाई का नेतृत्व किया है और उन्हें सिक्किम के लिए पार्टी प्रभारी बनाया है। विपक्षी महागठबंधन में राजद के बाद कांग्रेस सबसे बड़ी साझेदार पार्टी है। विपक्ष को उम्मीद है कि इस बार उसे सत्ता विरोधी लहर का लाभ मिलेगा, क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करीब डेढ़ दशक से सत्ता में हैं।

कांग्रेस को उम्मीद है कि उसे उन असंतुष्ट भाजपा कार्यकर्ताओं के कारण भी लाभ होगा, जिनके पास अपनी हताशा प्रकट करने के लिए पटना में पर्याप्त मौका नहीं है। भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व राज्य अध्यक्ष सुषमा साहू ने हाल में पार्टी छोड़कर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। उन्होंने हाल में एक जनसभा में लव सिन्हा को छोटा भाई बताया। साहू ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के इशारे पर उनका नामांकन रद्द किया गया और उन्होंने भाजपा पर उन्हें नजरअंदाज कर वैश्य समुदाय का अपमान किया। कांग्रेस इस बार बांकीपुर से भाजपा को तीसरी बार जीतने से रोक पाती है या नहीं, यह तीन नवंबर को पता चलेगा, जब इस सीट के लिए 3.91 लाख मतदाता बिहार विधानसभा के दूसरे चरण में मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे।


इस चुनावी मैदान में कुल 22 उम्मीदवार मैदान में है। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों के अलावा नवगठित ‘प्लूरल्स पार्टी’ की उम्मीदवार पुष्पम प्रिया चौधरी का नाम भी चर्चा का विषय बना हुआ है। चौधरी स्वयं को अपनी पार्टी की ओर से ‘‘मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार’’ बताती हैं। पुष्पम बिहार के जदयू नेता रहे और पूर्व विधान पार्षद विनोद चौधरी की पुत्री हैं। पुष्पम का कहना है कि उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ़ इकनॉमिक्स से पढ़ाई की है। राजग नेता लव सिन्हा को पैराशूट (बाहर से आए) उम्मीदवार बता रहे हैं, लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा का कहना है कि वह बिहार के पुत्र हैं और यहां के लोगों के लिए लंबे समय में काम कर रहे हैं।

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