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बिहार चुनाव: सीमाचंल से ग्राउंड रिपोर्ट: ...जो जीता वही सिकंदर
Thu, 05 Nov 2020 06:02 AM IST
देव कश्यप
हिमांशु मिश्र, कटिहार।
हिमांशु मिश्र, कटिहार।
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 05 Nov 2020 06:02 AM IST
सार
- नई पटकथा नए समीकरण के साथ राजतिलक को तैयार कोसी-सीमांचल
- ज्यादातर सीटों पर त्रिकोणीय-चतुष्कोणीय मुकाबले से बढ़ा रहस्य
- लोजपा की नई रणनीति और एआईएमआईएम की बढ़ी ताकत से बढ़ा भ्रम
- कोसी-सीमांचल में अल्पसंख्यक, महिला और प्रवासी होंगे निर्णायक
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Bihar Election
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिसने कोसी-सीमांचल जीता, उसने बिहार जीता। बीते कई चुनावों में निर्णायक भूमिका अदा करने वाला यह दोनों क्षेत्र इस बार भी हार-जीत की अंतिम पटकथा लिखने के लिए तैयार है। हालांकि बीते चुनाव की तुलना में बने नए-नए समीकरणों ने ज्यादातर सीटों को त्रिकोणीय-चतुष्कोणीय मुकाबले में उलझा दिया है। लोजपा की नई रणनीति और सीमांचल में एआईएमआईएम की बढ़ी ताकत ने भी परिणामों के संदर्भ में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
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अंतिम चरण में जिन 78 सीटों पर मतदान होना है, उनमें से आधी से अधिक सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाताओं की हिस्सेदारी 40 से 70 फीसदी के बीच है। दोनों ही इलाकों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मतप्रतिशत ज्यादा रहता आया है। बीते चुनाव में महिलाओं में जदयू के प्रति खासा क्रेज था। अल्पसंख्यकों का एकमुश्त वोट राजद-कांग्रेस-जदयू गठबंधन को गया था। बीते चुनाव की तरह इस बार भी ज्यादातर प्रवासी मजदूर महानगरों में लौट चुके हैं।
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नए समीकरण का चुनाव
बीते चुनाव के मुकाबले इस बार सब कुछ नया है। बीते चुनाव में कांग्रेस-राजद के साथ वाला जदयू इस बार राजग के साथ है, जबकि राजग की सहयोगी लोजपा इस बार अकेले चुनाव मैदान में है तो वाम दल राजद की अगुवाई वाले विपक्षी महागठबधंन के साथ है। हम की राजग में वापसी हो चुकी है तो रालोसपा राजग से बाहर बसपा और एआईएमआईएम के साथ ताल ठोक रही है। बीते चुनाव में अकेले उतरी जनअधिकार पार्टी इस बार भीम आर्मी सहित कुछ दलों के साथ मोर्चा बना कर चुनाव मैदान में उतरी है।
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एआईएमआईएम-लोजपा से दिलचस्प मुकाबला
एआईएमआईएम ने सीमांचल की करीब-करीब सभी सीटों को त्रिकोणात्मक जंग में उलझा दिया है। इसी इलाके की एक दर्जन सीटों पर लोजपा ने मुकाबले को चतुष्कोणीय बना दिया है। बीते लोकसभा चुनाव में किशनगंज और पूर्णिया की कई विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल करने के अलावा किशनगंज उपचुनाव में जीत हासिल कर एआईएमआईएम ने अपनी बढ़ती ताकत का अहसास कराया है, जबकि लोजपा ने जदयू के मुकाबले भाजपा के कई बागियों को उतार कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
तब राजग को लगा था झटका
बीते चुनाव में तीसरे चरण की 78 सीटों पर कांग्रेस-राजद-जदयू गठबंधन ने राजग को करारी शिकस्त दी थी। तब इस गठबंधन को 54 (जदयू 23, राजद 20, कांग्रेस 11), राजग को 21 (भाजपा 20, आरएलएसपी 1), सीपीआई माले को एक और निर्दलीय को दो सीटें हासिल हुई थी। कुल 18 सीटों पर जदयू-भाजपा आमने सामने थी। इसमें भाजपा को दस, जदयू को सात और सीपीआई माले को एक सीट हासिल हुई थी। जदयू ने लोजपा और हम के हिस्से में आई सभी 12 सीटों पर जीत हासिल की थी।
अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग मुद्दा
सबसे पिछड़े में शुमार इस क्षेत्र के अलग-अलग हिस्से में अलग-अलग मुद्दा हावी है। मसलन सबसे पिछड़े सीमांचल में बस प्रधानमंत्री मोदी ही मुद्दा हैं। समूचा चुनावी जंग मोदी विरोध और मोदी समर्थन पर सिमट गया है। अल्पसंख्यकों में एनआरएसी, नागरिकता संशोधन कानून को ले कर संशय, डर और नाराजगी है। विपक्ष अलग-अलग अंदाज में इसी मुद्दे पर अल्पसंख्यकों का समर्थन हासिल करने की कोशिश में है। कोसी के इलाके में रोजगार, पलायन, बाढ़ बड़ा मुद्दा है।