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Bihar: ‘वेतन-भत्तों के लिए आए हैं तो पान की दुकान खोल लें’, पुलिस अकादमी में डीजीपी विनय कुमार का बड़ा संदेश
Tue, 26 May 2026 10:58 AM IST
पटना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Tue, 26 May 2026 10:58 AM IST
सार
राजगीर बिहार पुलिस अकादमी में 69वें दीक्षांत समारोह में 19 नए डीएसपी ने शपथ ली। इस दौरान डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि पुलिस सेवा नौकरी नहीं, बल्कि जनसेवा है। उन्होंने अधिकारियों को ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण के साथ काम करने की सीख दी।
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डीजीपी विनय कुमार
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
बिहार के ऐतिहासिक शहर राजगीर स्थित बिहार पुलिस एकेडमी में मंगलवार को 69वें दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया गया। एक वर्ष के कठिन प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले 19 प्रशिक्षु डीएसपी ने पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया और राष्ट्र सेवा व संविधान की रक्षा की शपथ लेकर बिहार पुलिस की मुख्यधारा में शामिल हुए। इनमें 14 पुरुष और 5 महिला अधिकारी शामिल हैं।
समारोह का मुख्य आकर्षण बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार का संबोधन रहा। उन्होंने युवा अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस सेवा कोई साधारण नौकरी नहीं, बल्कि जनसेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। डीजीपी ने कहा, 'अगर कोई केवल वेतन-भत्तों और सुविधाओं के लिए इस सेवा में आया है, तो उससे बेहतर है कि वह पान की दुकान खोल ले।'
परेड की सलामी के दौरान भावुक दिखे परिजन
भव्य पासिंग आउट परेड की सलामी डीजीपी विनय कुमार ने ली। समारोह में एडिशनल डीजी सह निदेशक माला विलियम, डीआईजी अभय कुमार, डीआईजी दीपक रंजन और नालंदा एसपी भारत सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। अकादमी परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। खाकी वर्दी में सजे युवा अधिकारियों की कदमताल और पुलिस बैंड की धुनों ने पूरे परिसर को गौरवपूर्ण माहौल में बदल दिया। अपने बच्चों को अधिकारी बनते देख अभिभावकों की आंखें भी नम नजर आईं।
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‘असली परीक्षा अब फील्ड में होगी’
डीजीपी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अकादमी का प्रशिक्षण केवल शुरुआत है। असली चुनौतियां अब फील्ड में सामने आएंगी। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक प्रशिक्षण और फील्ड अनुभव ही एक अधिकारी को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को कानून के प्रति पूरी निष्ठा रखने की सलाह देते हुए कहा कि पुलिस खुद कानून नहीं तोड़ सकती। यदि जनता का भरोसा पुलिस से उठ गया, तो समाज में गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
पुलिस विभाग नहीं, विभागों का विभाग है- डीजीपी
अपने संबोधन में डीजीपी ने कहा कि पुलिस पर हर समस्या के समाधान की जिम्मेदारी होती है। शराबबंदी, अवैध खनन, सड़क दुर्घटना या कानून-व्यवस्था जैसी हर चुनौती में सबसे पहले पुलिस को ही आगे आना पड़ता है। उन्होंने साइबर क्राइम, नारकोटिक्स और ट्रैफिक प्रबंधन जैसी आधुनिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज की पुलिसिंग पहले से कहीं अधिक जटिल हो चुकी है। युवा अधिकारियों को तकनीकी रूप से दक्ष और संवेदनशील बनने की जरूरत है।
केपीएस गिल का उदाहरण देकर समझाया सेवा का अर्थ
डीजीपी विनय कुमार ने अपने संबोधन में पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल का उदाहरण देते हुए कहा कि पुलिस सेवा त्याग और समर्पण की मांग करती है। उन्होंने बताया कि केपीएस गिल ने एक प्रशिक्षु अधिकारी से कहा था कि अगर कोई केवल पैसे कमाने के लिए पुलिस सेवा में आना चाहता है, तो वह कोई व्यापार कर सकता है, क्योंकि यह सेवा जनहित और जिम्मेदारी के लिए है। समारोह का समापन राष्ट्रगान और पुलिस बैंड की प्रस्तुति के साथ हुआ।
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समारोह का मुख्य आकर्षण बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार का संबोधन रहा। उन्होंने युवा अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस सेवा कोई साधारण नौकरी नहीं, बल्कि जनसेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। डीजीपी ने कहा, 'अगर कोई केवल वेतन-भत्तों और सुविधाओं के लिए इस सेवा में आया है, तो उससे बेहतर है कि वह पान की दुकान खोल ले।'
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परेड की सलामी के दौरान भावुक दिखे परिजन
भव्य पासिंग आउट परेड की सलामी डीजीपी विनय कुमार ने ली। समारोह में एडिशनल डीजी सह निदेशक माला विलियम, डीआईजी अभय कुमार, डीआईजी दीपक रंजन और नालंदा एसपी भारत सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। अकादमी परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। खाकी वर्दी में सजे युवा अधिकारियों की कदमताल और पुलिस बैंड की धुनों ने पूरे परिसर को गौरवपूर्ण माहौल में बदल दिया। अपने बच्चों को अधिकारी बनते देख अभिभावकों की आंखें भी नम नजर आईं।
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‘असली परीक्षा अब फील्ड में होगी’
डीजीपी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अकादमी का प्रशिक्षण केवल शुरुआत है। असली चुनौतियां अब फील्ड में सामने आएंगी। उन्होंने कहा कि व्यावहारिक प्रशिक्षण और फील्ड अनुभव ही एक अधिकारी को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को कानून के प्रति पूरी निष्ठा रखने की सलाह देते हुए कहा कि पुलिस खुद कानून नहीं तोड़ सकती। यदि जनता का भरोसा पुलिस से उठ गया, तो समाज में गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
पुलिस विभाग नहीं, विभागों का विभाग है- डीजीपी
अपने संबोधन में डीजीपी ने कहा कि पुलिस पर हर समस्या के समाधान की जिम्मेदारी होती है। शराबबंदी, अवैध खनन, सड़क दुर्घटना या कानून-व्यवस्था जैसी हर चुनौती में सबसे पहले पुलिस को ही आगे आना पड़ता है। उन्होंने साइबर क्राइम, नारकोटिक्स और ट्रैफिक प्रबंधन जैसी आधुनिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज की पुलिसिंग पहले से कहीं अधिक जटिल हो चुकी है। युवा अधिकारियों को तकनीकी रूप से दक्ष और संवेदनशील बनने की जरूरत है।
केपीएस गिल का उदाहरण देकर समझाया सेवा का अर्थ
डीजीपी विनय कुमार ने अपने संबोधन में पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल का उदाहरण देते हुए कहा कि पुलिस सेवा त्याग और समर्पण की मांग करती है। उन्होंने बताया कि केपीएस गिल ने एक प्रशिक्षु अधिकारी से कहा था कि अगर कोई केवल पैसे कमाने के लिए पुलिस सेवा में आना चाहता है, तो वह कोई व्यापार कर सकता है, क्योंकि यह सेवा जनहित और जिम्मेदारी के लिए है। समारोह का समापन राष्ट्रगान और पुलिस बैंड की प्रस्तुति के साथ हुआ।