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Bihar News : सीएम नीतीश कुमार को 2020 के चुनाव में चैलेंज करने वाली पुष्पम प्रिया के पिता नहीं रहे
Sun, 16 Jul 2023 02:37 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण
Updated Sun, 16 Jul 2023 02:37 PM IST
सार
Nitish Kumar : 8 मार्च 2020 को अचानक देशभर के प्रमुख अखबारों में विज्ञापन के जरिए खुद को बिहार के मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताने वाली पुष्पम प्रिया के पिता नहीं रहे। वह नीतीश के करीबी थे। सीएम ने शोक भी व्यक्ति किया है।
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पूर्व जदयू एमएलसी विनोद कुमार चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अगर 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव की सबसे अनूठी पांच बातों की चर्चा करें तो उनमें एक विज्ञापन था। इस विज्ञापन ने जनता दल यूनाईटेड (JDU) को हिलाकर रख दिया था। जदयू के संस्थापकों में से एक उमाकांत चौधरी की पोती ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने खुद को बिहार के सीएम पद का दावेदार बताते हुए लाखों खर्च कर पूरे-पूरे पेज का विज्ञापन जारी किया था। आज पुष्पम प्रिया फिर चर्चा में हैं। वजह यह कि जदयू MLC रहे उनके पिता विनोद कुमार चौधरी का देहांत हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निधन पर चौधरी की पत्नी और जदयू विधायक भाई विनय कुमार चौधरी से बात कर सांत्वना दी है।
जदयू से परिवार की पहचान, मगर पुष्पम प्रिया बागी
दरभंगा जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर विशनपुर गांव के रहने वाले उमाकांत चौधरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बेहद करीबी माना जाता रहा। उनके बेटे विनोद कुमार चौधरी का दरभंगा के बलभद्रपुर में निधन हो गया। वह जदयू के एमएलसी रहे थे। उनके भाई विनय कुमार चौधरी अभी बेनीपुर से जदयू विधायक हैं। पूरा परिवार जदयू के प्रति समर्पित रहा है। इसलिए, जब 2020 में अचानक पुष्पम प्रिया चौधरी ने बिना पारिवारिक पहचान उजागर किए खुद को सीएम कैंडिडेट घोषित किया तो खोजबीन करने वाले चौंक गए थे। इस घर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ बगावत की आशंका दूर-दूर तक नहीं थी। चुनाव में जब पुष्पम प्रिया चौधरी और उनकी पार्टी प्लूरल्स कहीं नहीं टिकी तो वह एकदम से गायब हो गईं। बीच-बीच में सोशल मीडिया पर आती भी हैं तो नीतीश सरकार की किसी नीति या कार्रवाई के खिलाफ लिखकर शांत हो जाती हैं।
पिता के रहते भी रोकटोक नहीं, अब और मुखर होंगी
पिता के निधन के सदमे से निकलने के बाद पुष्पम प्रिया चौधरी अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ और ज्यादा हमलावर दिखें तो आश्चर्य नहीं होगा। पुष्पम प्रिया के पिता उनके स्टैंड को लेकर सार्वजनिक तौर पर कभी खिलाफ नहीं दिखे थे। उनका मानना था कि पढ़ी-लिखी है और अपने नजरिए से राजनीति को देखती है, इसलिए जो उचित लगे- करती है। अब उनके निधन के बाद पुष्पम प्रिया एक तरह से जदयू की जड़ से कट गई हैं। वह उस टैग से निकलकर और ज्यादा मुखर होंगी, ऐसा माना जा सकता है।
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जदयू से परिवार की पहचान, मगर पुष्पम प्रिया बागी
दरभंगा जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर विशनपुर गांव के रहने वाले उमाकांत चौधरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बेहद करीबी माना जाता रहा। उनके बेटे विनोद कुमार चौधरी का दरभंगा के बलभद्रपुर में निधन हो गया। वह जदयू के एमएलसी रहे थे। उनके भाई विनय कुमार चौधरी अभी बेनीपुर से जदयू विधायक हैं। पूरा परिवार जदयू के प्रति समर्पित रहा है। इसलिए, जब 2020 में अचानक पुष्पम प्रिया चौधरी ने बिना पारिवारिक पहचान उजागर किए खुद को सीएम कैंडिडेट घोषित किया तो खोजबीन करने वाले चौंक गए थे। इस घर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ बगावत की आशंका दूर-दूर तक नहीं थी। चुनाव में जब पुष्पम प्रिया चौधरी और उनकी पार्टी प्लूरल्स कहीं नहीं टिकी तो वह एकदम से गायब हो गईं। बीच-बीच में सोशल मीडिया पर आती भी हैं तो नीतीश सरकार की किसी नीति या कार्रवाई के खिलाफ लिखकर शांत हो जाती हैं।
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पिता के रहते भी रोकटोक नहीं, अब और मुखर होंगी
पिता के निधन के सदमे से निकलने के बाद पुष्पम प्रिया चौधरी अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ और ज्यादा हमलावर दिखें तो आश्चर्य नहीं होगा। पुष्पम प्रिया के पिता उनके स्टैंड को लेकर सार्वजनिक तौर पर कभी खिलाफ नहीं दिखे थे। उनका मानना था कि पढ़ी-लिखी है और अपने नजरिए से राजनीति को देखती है, इसलिए जो उचित लगे- करती है। अब उनके निधन के बाद पुष्पम प्रिया एक तरह से जदयू की जड़ से कट गई हैं। वह उस टैग से निकलकर और ज्यादा मुखर होंगी, ऐसा माना जा सकता है।
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