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Bihar : मेंटेनेंस नहीं होने से सारण में अंग्रेजों के जमाने का पुल ट्रक समेत जमींदोज; किस्मत से बचे चालक-उपचालक
Sat, 18 Mar 2023 07:48 PM IST
कुमार जितेंद्र ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
Published by: कुमार जितेंद्र ज्योति
Updated Sat, 18 Mar 2023 07:48 PM IST
सार
British era bridge Collapsed in Saran : अंग्रेजों के जमाने के इस पुल के पुनरूद्धार की मांग लंबे समय से हो रही थी, लेकिन न मेंटनेंस हो रहा था और न भारी वाहनों पर रोक लग रही थी। शनिवार की शाम लोडेड ट्रक के साथ पुल जमींदोज हो गया।
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बिहार के सारण में यह पुल ट्रक का भार नहीं सह सका।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सारण में तरैया थाना क्षेत्र के भलुआ में ब्रिटिशकालीन पुल शनिवार को एक गिट्टी लदे ट्रक के साथ जमींदोज हो गया। किस्मत से ट्रक का चालक व उपचालक की जान बच गई। पुल गिरने से चंचलिया पंचायत के कई गावों का संपर्क तरैया प्रखंड मुख्यालय, थाना और अंचल से कट गया है। ब्रिटिशकालीन लोहे का पुल काफी जर्जर हो चुका था। इसके जीर्णोद्धार की मांग काफी समय से उठ रही थी, लेकिन कोई काम नहीं किया गया।
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खैरियत थी कि पुल गिरते समय लोग संभले
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पुल से ट्रक का अगला हिस्सा पार कर गया था, कि तेज आवाज आई। जबतक कोई भी कुछ संभला पुल एक छोर से ट्रक समेत गिर गया और फिर दोनों साइड के पहुंच पथ को छोड़ बाकी का हिस्सा पूरी तरह से नीचे नजर आने लगा। पुल और ट्रक के गिरने की आवाज भी तेज थी और पुल के पहुंच पथ पर भी कई लोग थे, इसलिए चीखपुकार तुरंत मच गई। भारी संख्या में लोग पहुंच गए। लोगों ने देखा कि ट्रक का अगला हिस्सा ऊपर अटक गया है, जबकि पिछला हिस्सा जमीन पर टिक गया है। ट्रक दाएं-बाएं नहीं गिर जाए, इस डर से लोग सहमे रहे। किसी तरह चालक-उपचालक को लोगों ने सहारा देकर निकाला। पुल के नीचे का हिस्सा सूखा था और लोग उधर से आवाजाही भी करते हैं, लेकिन हादसे के समय पुल के नीचे कोई नहीं था।
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विधानसभा तक उठी मांग, मगर अब फायदा क्या
ब्रिटिशकालीन लोहे का पुल काफी जर्जर हो चुका था। ग्रामीण इसे बनवाने की मांग लंबे समय से करते आ रहे थे। पूर्व मुखिया कृष्ण कुमार गुप्ता के बाद वर्तमान मुखिया नंदकिशोर साह ने भी पुल के बनाने को लेकर कई बार आवाज उठाई। इसके लिए कई बार धरना-प्रदर्शन भी और कई बार अलग-अलग स्तर पर मेमोरेंडम भी दिए गए। इस समस्या को विधायक जनक सिंह विधानसभा में भी उठा चुके हैं, लेकिन शनिवार को हादसे के बाद अब कहने-सुनने को कुछ नहीं बचा।
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