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ये हैं स्वच्छता के असली हीरो: आंखों से दिखाई नहीं देता, भीख मांगकर तैयार किया शौचालय

Wed, 18 Apr 2018 08:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल Updated Wed, 18 Apr 2018 08:28 PM IST
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Bihar: blind man who prepare toilet to support Swachh Bharat Abhiyan
मसहरू राम

कैसे आकाश में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारों....  बिहार के सुपौल जिले के ताउमा वार्ड के निवासी मसहरू राम पर दुष्यंत कुमार की यह पंक्तियां बिल्कुल सटीक बैठती हैं। पूरा गांव इन्हें सूरदास कहकर पुकारता है। आंखों से दिखाई नहीं देता है, गरीबी ने शरीर को भी लाचार बना दिया है, इसलिए परिवार का भरण पोषण करने के लिए भीख मांगते हैं। मसहरू राम, गांव में घूम-घूमकर ढपली बजाते हैं, गीत गाते हैं। जो कुछ मिलता है उससे अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। 55 साल के मसहरू के परिवार में पत्नी और 5 बच्चे हैं। 

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कहते हैं कि सूरदास के काव्य में समाज बनने की प्रक्रिया को देखा जा सकता है। मसहरू राम का प्रयास भी बिहार में सफाई के प्रति लोगों के मन में बदलाव की प्रक्रिया का एक हिस्सा है। भीषण गरीबी से जूझते हुए मसहरू के कानों में जब शौचालय और उसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी पहुंची तो बंद आंखों से ही तय कर लिया कि मेरे घर में भी अपना शौचालय होगा।  बस फिर क्या था, खुद से ही इस प्रयास में कदम बढ़ाने शुरू किए। 

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आसान नहीं था सफर

Bihar: blind man who prepare toilet to support Swachh Bharat Abhiyan
मसहरू राम

मसहरू का घर जिस गांव में स्थित है, सीधी सड़क से उस गांव का कोई वास्ता नहीं है। मसहरू के घर पहुंचने के लिए, खेतों की पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ता है। यह इतना जटिल है कि इस रास्ते पर आंखों वाले इंसान के कदम भी डगमगा जाते हैं लेकिन मसहरू के हौसले नहीं डगमाए। सड़क से करीब 1.5 किमी दूर इन आढ़े-तिरछे रास्तों पर मसहरू राम ने खुद अपने सिर पर ईंट और सीमेंट को ढोया और घर में शौचालय का निर्माण करवाया। 

जब हमने उनसे सवाल पूछा कि आखिर शौचालय की जरूरत आपको कैसे महसूस हुई तो उन्होंने कहा कि मेरी बेटियां, खुले में शौच नहीं करेंगी। बंद आंखों वाले इस इंसान की सोच ने पूरे गांव को सोचने पर मजबूर कर दिया। और पूरे गांव के हर घर में देखते ही देखते शौचालय बन गए। गांव के सरपंच नंद किशोर ने हमें बताया कि गांव में करीब 2700 शौचालयों का निर्माण करवाया गया। 

जिले स्तर पर हो चुका है सम्मान

Bihar: blind man who prepare toilet to support Swachh Bharat Abhiyan
मसहरू राम

मसहरू राम उर्फ सूरदास, के इस कदम ने उन्हें अपने जिले का स्वच्छता का हीरो बना दिया है। उनके इस प्रयास के बाद जिलाधिकारी बैद्यनाथ यादव ने भी मसहरू राम को सम्मानित किया। हमारी बातचीत में उन्होंने बताया कि शौचालय निर्माण के बाद जो राशि उन्हें सरकार द्वारा मिलती है, वह अब तक नहीं मिली है। यूएन की संस्था यूनीसेफ के साथ मिलकर हमने यह जानकारी जिले के उप विकास आयुक्त डॉ नवल किशोर चौधरी तक पहुंचाई, उन्होंने इस पर एक्शन लेते हुए मसहरू के खाते में राशि ट्रांस्फर करवाई।



अधिकारियों द्वारा विश्वास दिलाया गया है कि जल्द ही मसहरू के गांव तक जाने के लिए सड़क का निर्माण करवाया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार की अन्य योजनाओं से मसहरू और उनके परिवार को लाभान्वित करवाया जाएगा।  

 

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