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जामताड़ा जैसे मॉडल पर मध्य प्रदेश के जिलों में ऑनलाइन ठगी, चार आरोपी गिरफ्तार
Fri, 11 Sep 2020 12:45 PM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Tanuja Yadav
Updated Fri, 11 Sep 2020 12:45 PM IST
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फर्जी सिम कार्ड और ई-वॉलेट से लोगों के खाते से निकाले पैसे
- फोटो : Social media
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झारखंड के जामताड़ा की तर्ज पर मध्य प्रदेश की साइबर सेल ने एक बड़े अंतरराज्यीय ठग के भांडाफोड़ का दावा किया है। इस ऑनलाइन धोखेधड़ी करने वाले लोगों को लॉजिस्टिक सहयोग दिया जाता था, उन्हें झूठी और गलत आईडी पर जारी किए गए सिम कार्ड दिए जाते थे।
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मध्य प्रदेश के शिवपुरी में पुलिस ने ऐसे चार लोगों को गिरफ्तार किया है, इसमें टेलीकॉम सर्विस कंपनी के तीन रिटेलर और एक डिस्ट्रीब्यूटर शामिल है। ये लोग दिल्ली और दूसरे राज्यों के ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के लिए लॉजिस्टिक आपूर्तिकर्ता का काम करते थे।
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पुलिस ने बताया कि अभी इस गिरोह के कुछ लोग फरार हैं। दरअसर भोपाल के एक व्यापारी ने जनवरी में एक क्रेडिट कार्ड फ्रॉड की शिकायत की थी, जिसकी पुलिस जांच कर रही थी। जांच में जिस आरोपी को पकड़ा उसके पास से दो हजार से ज्यादा सिम कार्ड बरामद किए गए जो अलग-अलग आईडी पर जारी किए गए थे।
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पुलिस ने बताया कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में झारखंड के जामताड़ा जैसा मॉडल देखा जा रहा है, इसमें शिवपुरी, शियोपुर, गुना और भिंड शामिल हैं। भोपाल के साइबर सेल के एसपी गुरकरण सिंह का कहना है कि 15 जनवरी को भोपाल के निवासी योगेश सूद ने एक शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में कहा गया कि योगेश को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया था, कॉल पर महिला बात कर रही थी और खुद को क्रेडिट कार्ड कंपनी का बता रही थी। महिला ने योगेश ने क्रे़डिट कार्ड की सीमा बढ़ाने को कहा और एक लिंक दिया। महिला ने कहा कि इस लिंक पर जाकर सभी प्रक्रिया पूरी करनी है।
योगेश सूद की शिकायत में आगे कहा गया कि जैसे ही उन्होने लिंक पर क्लिक किया, उनके खाते से 1.22 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए। योगेश सूद की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया और जांच शुरू कर दी। जांच में पता चला कि योगेश के खाते से पैसा 12 ऑनलाइन वॉलेट में ट्रांसफर किया गया था।
जांच में पुलिस को पता चला कि जिस नंबर से योगेश पर कॉल आती हैं और जिन ऑनलाइन वॉलेट में पैसा ट्रांसफर हुआ है वो मध्य प्रदेश के अलग-अलग पतों पर रजिस्टर हैं। पुलिस ने एक टीम को शिवपुरी भेजा, जहां से टेलीकॉम कंपनी के रिटेलर और डिस्ट्रीब्यूटर को हिरासत में लिया गया।
जांच अधिकारी अभिषेक सोनेकर ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी आईडी और आधार कार्ड बनाने की बात कबूली है। आरोपियों ने गांव वालों की ओर से उपलब्ध कराए गए प्रमाण पत्रों के आधार पर ये फर्जी आईडी बनाई और जामताड़ा के मॉडल पर फिशिंग का कारोबार किया।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में सतीश दुबे नाम का एक बिचौलिया भी था, जो फर्जी सिम कार्ड बेचने और बनाने में आरोपियों की मदद करता था। फिलहाल सतीश जेल में है।
