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Toyota: टोयोटा के चेयरमैन को 33 अरब डॉलर के सौदे में जांच का करना पड़ेगा सामना, जानें क्या है पूरा मामला
Thu, 12 Jun 2025 07:20 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 12 Jun 2025 07:20 PM IST
सार
Toyota Motor (टोयोटा मोटर) के चेयरमैन अकियो टोयोडा पर इस हफ्ते गुरुवार को होने वाली सालाना शेयरहोल्डर्स मीटिंग में 33 अरब डॉलर की डील को लेकर सख्त सवाल उठ सकते हैं। यह डील टोयोटा की एक अहम सप्लायर कंपनी को पूरी तरह से प्राइवेट बनाने के लिए की गई है।
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Toyota Motor Chairman Akio Toyoda
- फोटो : Toyota
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विस्तार
Toyota Motor (टोयोटा मोटर) के चेयरमैन अकियो टोयोडा पर इस हफ्ते गुरुवार को होने वाली सालाना शेयरहोल्डर्स मीटिंग में 33 अरब डॉलर की डील को लेकर सख्त सवाल उठ सकते हैं। यह डील टोयोटा की एक अहम सप्लायर कंपनी को पूरी तरह से प्राइवेट बनाने के लिए की गई है।
हालांकि इस बार पहली बार ऐसा हो रहा है कि बीते तीन वर्षों में किसी भी शेयरहोल्डर सलाहकार संस्था ने टॉयोडा का विरोध नहीं किया है। लेकिन फिर भी गवर्नेंस से जुड़े सवाल उनसे पूछे जाने तय माने जा रहे हैं। इसकी झलक सप्लायर कंपनी टोयोटा इंडस्ट्रीज की इसी हफ्ते हुई बैठक में देखने को मिली।
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हालांकि इस बार पहली बार ऐसा हो रहा है कि बीते तीन वर्षों में किसी भी शेयरहोल्डर सलाहकार संस्था ने टॉयोडा का विरोध नहीं किया है। लेकिन फिर भी गवर्नेंस से जुड़े सवाल उनसे पूछे जाने तय माने जा रहे हैं। इसकी झलक सप्लायर कंपनी टोयोटा इंडस्ट्रीज की इसी हफ्ते हुई बैठक में देखने को मिली।
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टोयोटा इंडस्ट्रीज की डील पर विवाद
टोयोटा इंडस्ट्रीज, जो कि फोर्कलिफ्ट बनाने वाली कंपनी है, उसके शेयरहोल्डर्स ने 4.7 ट्रिलियन येन (करीब 33 अरब डॉलर) की डील पर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि यह डील अल्पसंख्यक शेयरधारकों के साथ अन्याय है। इस डील में हर शेयर के लिए 16,300 येन की पेशकश की गई है।
हालांकि टोयोटा मोटर के लिए यह सौदा फायदेमंद माना जा रहा है, लेकिन जेन्नर एसेट मैनेजमेंट जैसे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हितों की अनदेखी को लेकर चिंता जताई है।
यह भी पढ़ें - Mercedes-AMG G 63 Collector's Edition: भारत में लॉन्च हुआ मर्सिडीज-एएमजी जी 63 का खास एडिशन, मॉनसून से है प्रेरित
टोयोटा इंडस्ट्रीज, जो कि फोर्कलिफ्ट बनाने वाली कंपनी है, उसके शेयरहोल्डर्स ने 4.7 ट्रिलियन येन (करीब 33 अरब डॉलर) की डील पर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि यह डील अल्पसंख्यक शेयरधारकों के साथ अन्याय है। इस डील में हर शेयर के लिए 16,300 येन की पेशकश की गई है।
हालांकि टोयोटा मोटर के लिए यह सौदा फायदेमंद माना जा रहा है, लेकिन जेन्नर एसेट मैनेजमेंट जैसे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हितों की अनदेखी को लेकर चिंता जताई है।
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"यह फैसला अल्पसंख्यक निवेशकों की अनदेखी कर नहीं लिया गया"
टोयोटा इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष कोइची इटो ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि यह निर्णय सभी जरूरी बातों को ध्यान में रखकर लिया गया है। और इसका मकसद किसी पक्ष को नुकसान पहुंचाना नहीं था।
इस डील के तहत एक नया होल्डिंग कंपनी बनाई जाएगी, जिसमें टोयोटा फुडोसन (एक नॉन-लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनी) 180 अरब येन का निवेश करेगी। टोयोटा खुद 1 अरब येन लगाएंगी और टोयोटा मोटर 700 अरब येन नॉन-वोटिंग प्रेफर्ड शेयरों के रूप में निवेश करेगी।
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टोयोटा इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष कोइची इटो ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि यह निर्णय सभी जरूरी बातों को ध्यान में रखकर लिया गया है। और इसका मकसद किसी पक्ष को नुकसान पहुंचाना नहीं था।
इस डील के तहत एक नया होल्डिंग कंपनी बनाई जाएगी, जिसमें टोयोटा फुडोसन (एक नॉन-लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनी) 180 अरब येन का निवेश करेगी। टोयोटा खुद 1 अरब येन लगाएंगी और टोयोटा मोटर 700 अरब येन नॉन-वोटिंग प्रेफर्ड शेयरों के रूप में निवेश करेगी।
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शेयरहोल्डर्स मीटिंग में रिकॉर्ड सवाल-जवाब
मंगलवार को टोयोटा इंडस्ट्रीज की बैठक लगभग दो घंटे चली, जो कि कंपनी के इतिहास की सबसे लंबी मीटिंग रही। इस दौरान अधिकारियों को दो दर्जन से ज्यादा सवालों का सामना करना पड़ा।
हॉन्गकॉन्ग की ओएसिस मैनेजमेंट नाम की निवेशक कंपनी, जिसने टोयोटा मोटर और टोयोटा इंडस्ट्रीज दोनों में हिस्सेदारी ले रखी है। उसने भी शेयर की कीमत बढ़ाने की मांग रखी है।
टोयोटा का कहना है कि इस अधिग्रहण से टोयोटा इंडस्ट्रीज को ग्रुप की अन्य कंपनियों के साथ बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी। और वह लाभ के छोटे लक्ष्य के दबाव से मुक्त होकर दीर्घकालिक योजनाओं पर ध्यान दे सकेगी। यह डील टोयोटा को एक पारंपरिक ऑटोमेकर से "मोबिलिटी कंपनी" में बदलने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है।
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मंगलवार को टोयोटा इंडस्ट्रीज की बैठक लगभग दो घंटे चली, जो कि कंपनी के इतिहास की सबसे लंबी मीटिंग रही। इस दौरान अधिकारियों को दो दर्जन से ज्यादा सवालों का सामना करना पड़ा।
हॉन्गकॉन्ग की ओएसिस मैनेजमेंट नाम की निवेशक कंपनी, जिसने टोयोटा मोटर और टोयोटा इंडस्ट्रीज दोनों में हिस्सेदारी ले रखी है। उसने भी शेयर की कीमत बढ़ाने की मांग रखी है।
टोयोटा का कहना है कि इस अधिग्रहण से टोयोटा इंडस्ट्रीज को ग्रुप की अन्य कंपनियों के साथ बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी। और वह लाभ के छोटे लक्ष्य के दबाव से मुक्त होकर दीर्घकालिक योजनाओं पर ध्यान दे सकेगी। यह डील टोयोटा को एक पारंपरिक ऑटोमेकर से "मोबिलिटी कंपनी" में बदलने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है।
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एडवाइजर फर्मों का समर्थन
इस बार प्रमुख शेयरधारक सलाहकार कंपनियां ग्लास लेविस और इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर सर्विसेस (ISS) ने टोयोडा को फिर से बोर्ड में शामिल करने की सिफारिश की है। पिछले दो सालों में उन्होंने इसका विरोध किया था। इस बार समर्थन के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
घटता समर्थन, बढ़ती चिंता
पिछले कुछ वर्षों में टोयोडा को शेयरहोल्डर्स का समर्थन कम होता जा रहा है। 2024 में उन्हें सिर्फ 72 प्रतिशत समर्थन मिला, जो कि टोयोटा के किसी भी डायरेक्टर को अब तक का सबसे कम समर्थन है। इससे पहले 2023 में उन्हें 85 प्रतिशत और 2022 में 96 प्रतिशत समर्थन मिला था।
टोयोटा की अपनी न्यूज सर्विस को दिए एक इंटरव्यू में टोयोडा ने कहा था कि अगर यही रुझान चलता रहा तो उनका बोर्ड में स्थान भी खतरे में पड़ सकता है।
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इस बार प्रमुख शेयरधारक सलाहकार कंपनियां ग्लास लेविस और इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर सर्विसेस (ISS) ने टोयोडा को फिर से बोर्ड में शामिल करने की सिफारिश की है। पिछले दो सालों में उन्होंने इसका विरोध किया था। इस बार समर्थन के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।
घटता समर्थन, बढ़ती चिंता
पिछले कुछ वर्षों में टोयोडा को शेयरहोल्डर्स का समर्थन कम होता जा रहा है। 2024 में उन्हें सिर्फ 72 प्रतिशत समर्थन मिला, जो कि टोयोटा के किसी भी डायरेक्टर को अब तक का सबसे कम समर्थन है। इससे पहले 2023 में उन्हें 85 प्रतिशत और 2022 में 96 प्रतिशत समर्थन मिला था।
टोयोटा की अपनी न्यूज सर्विस को दिए एक इंटरव्यू में टोयोडा ने कहा था कि अगर यही रुझान चलता रहा तो उनका बोर्ड में स्थान भी खतरे में पड़ सकता है।
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टोयोटा इंडस्ट्रीज की जड़ें
टोयोटा इंडस्ट्रीज की शुरुआत 1926 में टोयोडा ऑटोमेटिक लूम वर्क्स के रूप में हुई थी, जिसका मकसद था ऑटोमैटिक करघे (लूम) बनाना। बाद में कंपनी में ऑटोमोटिव डिवीजन बना जिसे अलग कर के टोयोटा मोटर का रूप दिया गया। और यहीं से शुरू हुआ टोयोटा का ऑटो इंडस्ट्री में सफर।
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टोयोटा इंडस्ट्रीज की शुरुआत 1926 में टोयोडा ऑटोमेटिक लूम वर्क्स के रूप में हुई थी, जिसका मकसद था ऑटोमैटिक करघे (लूम) बनाना। बाद में कंपनी में ऑटोमोटिव डिवीजन बना जिसे अलग कर के टोयोटा मोटर का रूप दिया गया। और यहीं से शुरू हुआ टोयोटा का ऑटो इंडस्ट्री में सफर।
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