भारत में सड़क हादसों में हर साल हजारों लोगों की मौत हो जाती है। हादसे के बाद मदद मिल जाए तो जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने वाले घायलों की जान बचाई जा सकती है। घायलों की मदद करने वालों को भी कोई परेशानी नहीं होती। इस खबर में आपको गोल्डन ऑवर का महत्व बताया जा रहा है।
हादसा होने के बाद क्या करें
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रोड एक्सीडेंट
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अगर सड़क पर जाते समय आपके सामने किसी के साथ हादसा हो जाए। तो हमेशा मदद करनी चाहिए। मरीज को अस्पताल पहुंचने में जितना समय लगता है। उसके बचने की उम्मीद उतनी ही कम हो जाती है।
क्या होता है गोल्डन ऑवर
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रोड एक्सीडेंट के बाद गोल्डन ऑवर का महत्व
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हादसा होने के बाद अगले एक घंटे के अंदर मरीज को सही इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचने की उम्मीद काफी ज्यादा हो जाती है। हादसे के बाद के पहले एक घंटे को ही गोल्डन ऑवर कहा जाता है।
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क्यों होती है जरूरत
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For Reference Only
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दुर्घटना में घायल होने के बाद कई बार घायल के शरीर से काफी ज्यादा खून बह जाता है। जान बचाने के लिए खून को रोकना काफी जरूरी हो जाता है। वहीं कुछ मामलों में हादसे के बाद कुछ लोगों को शॉक लग जाता है। ऐसी स्थिति में हॉर्ट अटैक आने का खतरा ज्यादा हो जाता है। हॉर्ट अटैक के दौरान रक्तसंचार अवरुद्ध होने से भी हृदय की गति प्रभावित होकर बिगड़ जाती है। इस स्थिति में अगले कुछ मिनट का समय बेहद कीमती होता है।
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मदद करने पर आपको नहीं होगी परेशानी
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रोड एक्सीडेंट के बाद गोल्डन ऑवर का महत्व
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कई लोग ये सोचकर मदद करने के लिए आगे नहीं आते कि बाद में उन्हें परेशानी हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019, धारा-134ए के तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति पर उस घटना के लिए किसी भी तरीके से कोई केस नहीं चलाया जाएगा। अस्पताल पहुंचने से पहले ही घायल व्यक्ति की मौत भी हो जाए तो पहुंचाने की कोशिश करने वाले व्यक्ति पर कोई मामला नहीं चलाया जाएगा।
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