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Bike Taxi: बंगलूरू की सड़कों पर फिर लौटी बाइक टैक्सी, कर्नाटक HC ने कहा- सरकार व्यापार पर रोक नहीं लगा सकती

Thu, 21 Aug 2025 08:40 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 21 Aug 2025 08:40 PM IST
सार

करीब दो महीने के बाद गुरुवार को बंगलूरू की सड़कों पर बाइक टैक्सी दोबारा दिखीं। हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आखिर व्यापार पर पाबंदी क्यों लगाई जा रही है, जबकि इसे नियंत्रित करना भी संभव है।

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Bike Taxis Make a Comeback in Bengaluru After Court Nods to Regulation Over Ban
Bike Taxi - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

करीब दो महीने के बाद गुरुवार को बंगलूरू की सड़कों पर बाइक टैक्सी दोबारा दिखीं। उबर, रैपिडो और ओला जैसी राइड-हेलिंग कंपनियों ने अपनी सेवाएं फिर से शुरू कर दीं। यह कदम कर्नाटक हाई कोर्ट के सवाल उठाने के बाद आया, जिसमें सरकार से बाइक टैक्सी पर पूरी तरह से रोक लगाने के बजाय उसे नियंत्रित करने की बात कही गई थी। एप पर फीचर उपलब्ध होते ही कई लोग इसका इस्तेमाल करने लगे।
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कोर्ट ने सरकार से पूछा सवाल
बुधवार को हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आखिर व्यापार पर पाबंदी क्यों लगाई जा रही है, जबकि इसे नियंत्रित करना भी संभव है। चीफ जस्टिस विभु बखरू और जस्टिस सीएम जोशी की बेंच ने सरकार से कहा कि इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचा जाए, क्योंकि यह लोगों की आजीविका से जुड़ा मामला है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

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Karnataka High Court - फोटो : ANI
सरकार को नीति बनाने का सुझाव
कर्नाटक के परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि हाई कोर्ट ने सरकार को एक महीने का समय दिया है, ताकि यह तय किया जा सके कि बाइक टैक्सी के लिए कोई नीति बनाई जाए या नहीं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट ने कंपनियों को औपचारिक रूप से संचालन की अनुमति नहीं दी है। फैसला प्रवर्तन एजेंसियों से चर्चा के बाद लिया जाएगा।

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13 राज्यों में मान्यता प्राप्त है बाइक टैक्सी
कोर्ट ने यह भी कहा कि देश के 13 राज्यों में बाइक टैक्सी को कानूनी रूप से मान्यता मिली हुई है। यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत संरक्षित एक वैध व्यापार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सीधे तौर पर रोक लगाना "प्रत्यक्ष प्रतिबंध" जैसा है, जबकि राज्य चाहे तो नियम बनाकर इसे नियंत्रित कर सकता है। केंद्रीय मोटर वाहन एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 में भी राज्यों की मंजूरी के अधीन बाइक टैक्सी की अनुमति दी गई है।

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Bike Taxi - फोटो : ANI
आजीविका और जरूरत दोनों है बाइक टैक्सी
बाइक टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अदी नारायण ने कहा कि हाई कोर्ट की टिप्पणी ने यह साफ कर दिया है कि बाइक टैक्सी न सिर्फ कानूनी रूप से वैध हैं बल्कि शहरी परिवहन के लिए बेहद जरूरी भी हैं। उन्होंने कहा कि बाइक टैक्सी लोगों को सस्ती, सुरक्षित और तेज लास्ट-माइल कनेक्टिविटी देती हैं। यह किसी विलासिता की चीज नहीं बल्कि एक जरूरत है। कोर्ट ने यह भी माना कि यह ड्राइवरों की आजीविका की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

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जून में लगा था बैन
गौरतलब है कि कर्नाटक में 16 जून को बाइक टैक्सी पर रोक लगा दी गई थी। इसके चलते ऑफिस जाने वाले कई लोग मजबूरी में महंगे ऑटो और कैब लेने लगे थे या फिर पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर रह गए थे। यह प्रतिबंध 2 अप्रैल को जस्टिस बी श्याम प्रसाद के आदेश के बाद लगाया गया था। जिसमें कहा गया था कि जब तक सरकार मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नियम और गाइडलाइन नहीं बनाती, तब तक सेवाओं को बंद रखा जाए। 

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