फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Astrology ›   light a diya on narak chaturdashi for yama know significance

नरक चतुर्दशी पर जरूर जलाएं यम दीपक, इन बातों का रखें विशेष ध्यान, भूलकर भी न करें ये गलतियां

Tue, 03 Nov 2026 07:49 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह Updated Tue, 03 Nov 2026 07:49 PM IST
सार

धनतेरस के बाद और दीपावली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी और छोटी दीवाली मनाई जाती है।कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन यम का दीपक का जलाने खास महत्व है। 

विज्ञापन
light a diya on narak chaturdashi for yama know significance
नरक चतुर्दशी पर जरूर जलाएं यम दीपक, इन बातों का रखें विशेष ध्यान, - फोटो : AI

विस्तार

धनतेरस से दीपावली की शुरुआत हो जाती है। इस पांच दिवसीय पर्व में हर दिन का अपना-अपना महत्व है। हिंदू धर्म में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का खास धार्मिक महत्व है। यह दिन नरक चतुर्दशी और छोटी दीवाली के नाम से जाना जाता है। दीपावली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी मनाया जाता है। 

विज्ञापन


इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा और उनके निमित्त दीपदान करने की धार्मिक मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, घर के बाहर यम दीप जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। 
विज्ञापन


कब शुरू हुई नरक चतुर्दशी पर यम दीप जलाने की परंपरा? 

वैदिक पंचांग के मुताबिक, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस साल चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर शुरू होगी और 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 29 मिनट समाप्त होगी। इसिलए नरक चतुर्दशी 7 नवंबर दिन शनिवार को मनाई जाएगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


दीपक जलाने से मिलता है मोक्ष

धार्मिक मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर यमराज के नाम से दीपक जलाई जाती है। इस दिन विधि-विधान से दीपदान करने पर अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है और यमराज की कृपा होती है। दीपक जलाते समय यमदेव से परिवार की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना की जाती है। मोक्ष प्राप्ति की भी प्रार्थना की जाती है। माना जाता है कि यम दीपक जीवन से नकारात्मकता और बुराइयों को दूर करने का प्रतीक है।

धनतेरस 2026: सोना-चांदी नहीं खरीद सकते तो घर लाएं ये 6 शुभ चीजें, मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न


क्या है नरक चतुर्दशी का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि छोटी दीवाली के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था और संसार को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। इस विजय की स्मृति में इस तिथि को नरक चतुर्दशी के नाम से भी मनाया जाता है। नरक चतुर्दशी के दिन शाम को दीपक जलाया जाता है और बुराई पर अच्छाई की जीत और जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का संदेश दिया जाता है।

दिवाली कैलेंडर 2026: 6 नवंबर से शुरू होगा दीपोत्सव, जानें धनतेरस से भाई दूज तक की सही तिथियां और शुभ मुहूर्त

नरक चतुर्दशी पर न करें ये काम
 

इस दिन यमराज की पूजा होती है। मान्यता है कि इस दिन किसी भी जीव की हत्या नहीं करनी चाहिए। यम की दिशा दक्षिण मानी गई है। इस दिन घर की दक्षिण दिशा को भूलकर भी गंदा नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में तेल के दान का विशेष महत्व है, लेकिन इस दिन तेल का दान नहीं करना चाहिए। इससे देवी लक्ष्मी नाराज होती हैं। इस दिन तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed