शनि महाराज ढाई साल तक तुला राशि में रहने के बाद 2 नंबर की शाम वृश्चि राशि में प्रवेश कर गए। वृश्चिक राशि शनि की शत्रु राशि है। शनि का इस राशि में आने बीते ढ़ाई साल के मुकाबले शनि के प्रकोप को बढ़ाने वाला है।
ज्योतिषीय नियम के अनुसार वृश्चिक राशि में शनि के आने से धनु राशि की साढ़ेसाती शुरु हो गई है। तुला और वृश्चिक राशि वाले पहले से ही साढ़ेसाती के प्रभाव में हैं लेकिन इनके साढ़ेसाती का चरण बदल गया है। ऐसे में शनि के प्रभाव भी बदलेंगे।
दूसरी ओर अब मेष और सिंह राशि वालों की ढैय्या शुरु हो गई है जिससे अब इन दोनों राशि के व्यक्ति भी शनि के प्रभाव में रहेंगे। ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा के अनुसार ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या आने के कुछ लक्षण हैं जिनसे आप खुद जान सकते हैं कि आपके लिए शनि शुभ हैं या प्रतिकूल।
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