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सावन में शनि-मंगल का यह संयोग ठीक नहीं जानिए क्या होगा अंजाम

31 जुलाई को मंगल चन्द्रमा की राशि कर्क में पहुंचेंगे। इस राशि को ज्योतिषशास्त्र में जल तत्व की राशि कहा गया है जबकि मंगल स्वयं अग्नि तत्व का कारक ग्रह हैं और मेष एवं वृश्चिक राशि का स्वामी है। यानी दो विरोधी स्वभाव वाले राशि और ग्रह का संयोग होने जा रहा है।

मंगल यहां 15 सितंबर तक यानी अगले 45 दिनों तक रहेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार मंगल के जल तत्व की राशि कर्क में आते ही समूचे उत्तर एवं पूर्वोत्तर भारत में जमकर बारिश का दौर शुरू होगा जिससे कई प्रदेशो में भयानक बाढ़ आ सकता है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम में अब तक हुई बारिश के विषय में भारतीय मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जून-जुलाई के दो महीनों में पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखण्ड को छोड़ कर देश के सभी भागों में अच्छी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

अब जब मंगल उत्तर और पूर्व दिशा को प्रभावित करने वाली राशि कर्क में गोचर करेंगे तो इन प्रदेशों में न केवल वर्षा की कमी को पूरा  करेंगे बल्कि बाढ़ से जन-धन की हानि भी पहुंचाएंगे।
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