मान्यता है कि रास्ते में किन्नर के
दर्शन हो जाएं तो काम सफल होता है। बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि किन्नरों को नाराज
नहीं करना चाहिए, इनके द्वारा कही गयी बातें पूरी होती है। इसलिए लोग इन्हें
प्रसन्न करके शुभ आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं। किन्नरों का वर्णन शास्त्रों
एवं पुराणों में भी मिलता है। शास्त्रों में इन्हें अलग श्रेणी प्रदान करके इनकी
पूजा करने की भी बात कही गयी है।
किन्नरों को महत्व देने के पीछे एक
ज्योतिषीय आधार भी है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार किन्नर बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व
करते हैं। बुध को ज्योतिषशास्त्र में युवराज का पद प्राप्त है। यह एक शुभ ग्रह है।
बुध जिस ग्रह के साथ बैठता उस ग्रह के अनुसार इसका फल होता है। इसलिए इसे तटस्थ
अथवा नपुंसक ग्रह भी कहा गया है। किन्नरों को बुध प्रभावी माना जाता है। इसलिए
किन्नरों को दिये गये दान और सम्मान से बुध ग्रह शुभ फल देता है।
बुध को
बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक माना जाता है। यह बहन, बुआ और मौसी का कारक भी
होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बुध की अच्छी स्थिति हो तो कही गयी बातें खाली
नहीं जाती यानी व्यक्ति की वाणी प्रभावशाली होती है। ऐसे व्यक्ति द्वारा कही गयी
बातें सच होती हैं। इसलिए कहा जाता है कि किन्नरों को नाराज नहीं करना चाहिए। बुध
की स्थिति शुभ होने से व्यक्ति प्रसन्नचित और खुशहाल होता है। व्यापार में कामयाबी
मिलती है। वाणी एवं लेखन से संबंधित कार्यों में सफलता मिलती है।
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