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2014 कैसा रहेगा भारत और दुनिया के लिए

प्रमोद कुमार अग्रवाल/ज्योतिषशास्त्री

साल 2014 के आरंभ के बारे में आंकलन करने पर ज्ञात होता है कि नए वर्ष की शुरुआत मध्यम रहेगी। जनवरी माह की 8 तारीख को पश्चिम दिशा में शुक्र अस्त होगा, जबकि इसी माह की 13 तारीख को शुक्र पूर्व दिशा में उदय होगा।

ज्योतिषीय दृष्टि से शुक्र की यह दशा उत्तम नहीं कही जा सकती है, क्योंकि इसके प्रभाव से भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के कई देशों में परस्पर संघर्ष, अनाज का संकट, महंगाई, युद्ध, अकाल, जल संकट, जन आंदोलन, जन आक्रोश देखने को मिल सकते हैं।

पढ़ें, 2014 का राशिफल विस्तार से


नव संवत्सर के वर्षेश लग्न कुंडली के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि इस बार देश में व्यापार में उन्नति के पर्याप्त अवसर मिलेंगे। विश्व पटल पर देश के सम्मान में वृद्धि होगी। शासक अपने बुद्धि एवं विवेक से देश की समस्याओं का समाधान करने में सफल होंगे।

राजनीति में होगा सत्ता परिवर्तन
ज्योतिषीय दृष्टिकोण से वर्ष 2014 में देश की राजनीति में काफी बदलाव देखने को मिलेंगे। पौष मास के शुक्ल पक्ष में शुक्र ग्रह के उदय होने के प्रभाव से सत्ता परिवर्तन का योग है। किसी भी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा, बल्कि ग्रहों के प्रभाव से उलट-फेर होगा।

उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम राज्यों में शासकों में मतभेद, जनता में भय, अनाज की कीमतों में वृद्धि, अनावृष्टि की संभावना रहेगी। विश्व पटल पर पश्चिम देशों के शासकों में विद्रोह, भय, रोग आदि का असर रहेगा। भारत के पड़ोसी देश अपना सिर उठाने की कोशिश करेंगे, लेकिन उन्हें मुंह की खानी पड़ेगी।

पढ़ें, टैरो कार्ड से जानिए 2014 का राशिफल

ग्रहण और उसके प्रभाव
इस साल दो सूर्य ग्रहण (02 अप्रैल और 23 अक्तूबर को) तथा दो चंद्र ग्रहण (15 अप्रैल और 8 अक्तूबर को) होंगे। इनमें से केवल 8 अक्तूबर की पूर्णिमा को लगने वाला खगास चंद्र ग्रहण ही दिखाई देगा, जिसका शुभ प्रभाव वृष, मिथुन तथा मकर राशि के जातकों पर है, जबकि अन्य राशियों के जातकों के लिए यह ग्रहण अनिष्ट प्रभाव देगा।

महंगाई, रोग वृद्धि, प्राकृतिक आपदाएं
वर्तमान में 30 मार्च, 2014 तक विक्रमीय संवत्सर 2070 चल रहा है, जिसका नाम `पराभव’ है। `पराभव’ संवत्सर के स्वामी विश्वदेव केतु हैं। इस संवत्सर में राजनीति के क्षेत्र में उथल-पुथल, महंगाई, राजनीति के बहुत से दिग्गजों और ज्ञानी-ध्यानी जनों को दंड, जनता में असंतोष जैसी बातों का सामना करना पड़ा है।

अब 31 मार्च, 2014 से संवत्सर 2071 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए संवत्सर का उदय होगा। इस नए संवत्सर का नाम `प्लवंग’ है। इस संवत्सर के स्वामी जगत के सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी हैं। इस संवत्सर के प्रभाव से देश में जौ, धान्य जैसे अनाज और रस पदार्थों के मूल्य में वृद्धि होने के साथ-साथ महंगाई, रोग वृद्धि, प्राकृतिक आपदाएं, ग्रीष्म ऋतु में वर्षा होना संभावित है।

अनाज का उत्पादन प्रचुर होगा
राजा और मंत्रीः संवत 2071 में चंद्र देवता राजा और मंत्री के रूप रहेंगे। जिनके नेतृत्व में भारत में  मंगल कार्यों का संपादन होगा। नव संवत्सर में वर्षा उत्तम रहेगी। अनाज का उत्पादन प्रचुर होगा। नए राजा आसीन होंगे, जनता की बहुत-सी समस्याओं और कष्टों का समाधान होगा। दक्षिण-पूर्व के क्षेत्रों में अच्छी वर्षा होने से जनता में प्रसन्नता बनी रहेगी। सूर्य के प्रभाव से शासकों में मतभेद, जनता में व्याकुलता और शासक वर्ग में भोग-विलास की प्रवृत्ति देखने को मिलेगी।

आपदाओं की वजह से जन-धन को क्षति पहुंचेगी
संवत 2071 का समय वाहन अश्व होने से विश्व के उत्तर-पश्चिम के भू-भागों में प्राकृतिक आपदाएं जैसे भूकंप, वर्षा में कमी, महंगाई, जनता में भय, राजाओं में युद्ध जैसी समस्या रह सकती है।

इस वर्ष आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया और सप्तमी को रविवार होने तथा इन तिथियों के स्वामी क्रमशः ब्रह्माजी एवं दुर्गाजी के होने से अत्यधिक गर्मी पड़ने की संभावना है।

देश के पूर्वी राज्यों के अलावा नेपाल, श्रीलंका, इटली, पकिस्तान, ईरान, फ्रांस, सयुंक्त अरब अमीरात, सेन फ्रांसिस्को, चीन, भूटान, दक्षिणी प्रदेशों में भूकंप के झटके आ सकते हैं। आपदाओं की वजह से जन-धन को क्षति पहुंचेगी।
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