गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर शुक्रवार को त्रिवेणी घाट पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। पूरे दिन घाट पर भक्तों का सैलाब उमड़ता रहा, लेकिन इस भीड़भाड़ में सबसे ज्यादा अनदेखी हुई स्वच्छता की। श्रद्धालु जहां गंगा स्नान कर पुण्य अर्जित करने पहुंचे, वहीं घाट की बदहाली ने उनकी आस्था को ठेस पहुंचाई। त्रिवेणी घाट के चारों ओर कूड़े के ढेर लगे मिले। कई जगह तो स्थिति इतनी खराब रही कि श्रद्धालु मायूस होकर लौटते नजर आए। गंगा सभा और नगर निगम, दोनों ही स्वच्छता की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते नजर आए। न तो घाट पर कूड़ेदान की व्यवस्था की गई और न ही समय पर कूड़ा उठाया गया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि जब गंगा समिति नगर निगम के भरोसे और निगम समिति के भरोसे है, तो घाट की सफाई करेगा कौन? श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पर्वों के दौरान घाटों पर विशेष सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि गंगा की निर्मलता और श्रद्धालुओं की आस्था दोनों बनी रहे।