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सपा प्रवक्ता ने कहा- यूसीसी पर भाजपा की मंशा साफ नहीं, चुनाव नजदीक आते ही शुरू हो जाती है जुमलेबाजी

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल को लेकर भाजपा की मंशा साफ नहीं है। चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही भाजपा जुमलेबाजी शुरू कर देती है। यूसीसी को लेकर भी यही स्थिति दिखाई दे रही है। यह बातें समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुभाष राजभर ने मीडिया वक्तव्य में कहीं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह वर्ष 2022 में भी यूसीसी को लेकर इसी तरह की बातें कह चुके हैं। इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस तैयारी सामने नहीं आई है। भाजपा केवल हिंदू-मुस्लिम के नाम पर मतदाताओं को बांटकर वोट हासिल करना चाहती है। यदि सरकार वास्तव में यूसीसी को लेकर गंभीर है तो पहले विपक्षी दलों से बातचीत करे और सभी की सहमति से मसौदा तैयार किया जाए। डॉ. राजभर ने कहा कि यूसीसी को लेकर भाजपा की कोई ठोस तैयारी नहीं है। उन्होंने तीन तलाक कानून का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आने पर भाजपा ऐसे मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम महिलाओं में ही तलाक की समस्या है? यदि भाजपा महिलाओं की स्थिति को लेकर गंभीर है तो उसे सभी समुदायों की महिलाओं की समस्याओं पर समान रूप से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर बात करते समय राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों को भी देखना चाहिए। उनके अनुसार, घरेलू हिंसा और तलाक जैसी समस्याओं से हिंदू महिलाएं भी बड़ी संख्या में प्रभावित हैं। ऐसे में किसी एक समुदाय को केंद्र में रखकर कानून बनाने की राजनीति उचित नहीं है। सपा प्रवक्ता ने कहा कि मौजूदा समय में किसी नए कानून की आवश्यकता नहीं है। संविधान और देश में पहले से मौजूद कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है। यदि सरकार मौजूदा कानूनों को ठीक से लागू कर मजलूम और प्रताड़ित लोगों को न्याय दिलाए तो यह अधिक महत्वपूर्ण और सार्थक कदम होगा। 'एक जिला-एक घोषणा पत्र' को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ. राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सही निर्णय लिया है। इससे पार्टी कार्यकर्ता प्रत्येक जिले की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझ सकेंगे और स्थानीय जरूरतों के मुताबिक उनके समाधान के लिए काम कर सकेंगे।

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