श्रीरामलीला सोसाइटी के बैनर तले आयोजित रामकथा के सातवें दिन हनुमान जी की महिमा का बखान किया गया। रामचरित मानस मर्मज्ञ मंदाकिनी दीदी ने कहा कि हनुमान जी की भूमिका एक मोटीवेशनल गुरु की तरह है, पर उनकी विशेषताएं हैं कि वे मानव जीवन को ही नहीं, भगवान को भी मोटीवेट करते हैं।श्रीहनुमान जी की करुणा और दया की वृत्ति रामराज्य की आधारशिला बनती है। रामकथा का आयोजन मर्चेंट चैंबर हॉल में किया गया। महाआरती और ओमकार के जाप के बाद रामकथा शुरू हुई। मंदाकिनी दीदी ने कहा कि गीता के समस्त योग जिनके व्यक्तित्व में विद्यमान हैं। ऐसा परिपूर्ण चरित्र जो प्रभू होते हुए भी दासानुदास भाव से सबकी सेवा करता है। ऐसे श्रीहनुमान ने अपने प्रभू श्रीराम का हृदय जीत लिया और उन्हें ऋणी बना दिया। दुर्बल चरित्र वाले सुग्रीव को श्रीहनुमान जी ने अपने पवित्र गुणों के प्रभाव से प्रभु की दिशा में मोड़ा। प्रभु से जोड़ा। उनकी मैत्री स्थापित की और उन्हें धन्यता प्रदान की। महाबली बाली के भय से भागे हुए सुग्रीव को भगवान श्रीराम की शरण में लाना और प्रभु से मित्रता की स्थापना करना, यह एक अनोखा उदाहरण है। यह भगवान श्रीराम का जीवन दर्शन प्रकट करता है। केवल गुणी व्यक्ति ही प्रभु तक पहुंच सकते हैं, इस भ्रम का निवारण सुग्रीव प्रसंग को पढ़कर होता है। श्रीहनुमान जी समाज के अन्तिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसके दुख और दैन्य का निवारण करते हैं। तब जाकर श्रीराम समाज में रामराज्य की स्थापना करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीहनुमान जी सशक्त सेतु की भूमिका का निर्वहन करते हैं। श्रीहनुमान जी प्रभु को जीव की व्यथा सुनाकर प्रभु के हृदय में जीव के प्रति करुणा, गुण उत्पन्न करते हैं। जीव को प्रभु की कृपालुता, बल और सामर्थ्य की कथा सुनाकर, उसके मन में प्रभु के लिए हृदय में विश्वास प्रकट करते हैं। श्रीहनुमान जी केवल मीठी मधुर कथा ही नहीं सुनाते, आवश्यकता पड़ने पर कड़वे प्रवचन भी सुनाते हैं। जब सुग्रीव राज्य मिलते ही प्रभु के दिये हुए उपदेश को भूल गए और अंत:पुर में अपनी पत्नी तारा के साथ बंद हो गए। चार माह बीतने पर हनुमान जी को चिंता हुई। तब वे कथा के जरिये सुग्रीव को फिर से अपने कर्तव्य के लिए प्रेरित करते हैं। महाआरती में सोसाइटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजीव गर्ग, कमल किशोर अग्रवाल, राकेश गर्ग, अमरनाथ मेहरोत्रा, पवन अग्रवाल, वीरेंद्र अग्रवाल, आलोक अग्रवाल आदि रहे।