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अमेठी के नायब सूबेदार सलमान ने जापान में लहराया तिरंगा, पुरुष डबल स्कल्स रोइंग में जीता कांस्य

अमेठी में तिलोई के डिगही खेरहना गांव के सलमान खान की कहानी हौसले, मेहनत और बदलाव की मिसाल है। वर्ष 2019 में लंबाई अधिक होने के कारण सेना में उनका चयन नौकायन के लिए हुआ तो सलमान ने इसे करने से ही मना कर दिया था। उन्हें इस खेल की जानकारी तक नहीं थी। प्रशिक्षकों और प्रशिक्षण अधिकारी मेजर नागेंद्र हुड्डा ने समझाया तो उन्होंने नाव संभाली और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। यही नौकायन अब उन्हें जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 के मंच तक ले गया। पुरुष डबल स्कल्स रोइंग में कांस्य पदक जीतकर सलमान ने अमेठी के साथ देश का मान बढ़ाया। गांव के कंपोजिट विद्यालय से प्रारंभिक पढ़ाई करने वाले सलमान वर्ष 2018 में मुंबई इंजीनियर ग्रुप, पुणे के जरिये भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वर्ष 2021 में उन्होंने पूरी लगन के साथ रोइंग शुरू की। वर्ष 2022 में टीम में जगह बनाई और गुजरात में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपने पहले ही मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की। वर्ष 2023 में कई प्रतियोगिताओं में रजत पदक मिले। वर्ष 2024 में ओलंपिक के लिए चयन हुआ, लेकिन ट्रायल में सफलता नहीं मिली। सलमान ने दक्षिण कोरिया में आयोजित एशियाई रोइंग चैंपियन कप में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद सेना में उनके प्रदर्शन को देखते हुए सिपाही से सीधे नायब सूबेदार के पद पर पदोन्नति मिली। सलमान के मुताबिक सामान्य तौर पर इस पद तक पहुंचने में एक सिपाही को 20 से 22 वर्ष की सेवा करनी पड़ती है। इस उपलब्धि ने उनका आत्मविश्वास और बढ़ाया। वर्ष 2025 और 2026 में कई राष्ट्रीय व एशियाई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक और वर्ष 2026 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी रजत हासिल किया। इसके बाद एशियन गेम्स के लिए उनका चयन हुआ। प्रतियोगिता से पहले स्विट्जरलैंड में खेला, बेल्जियम में करीब एक माह का प्रशिक्षण लिया और नीदरलैंड में विश्व चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया। जापान में आयोजित एशियन गेम्स निर्धारित तारीख से दो दिन बाद शुरू हुई। कर्नल रामाकृष्णन के समझाने पर सलमान पहली बार डबल स्कल रोइंग की तीन चरणों वाली फाइनल स्पर्धा में उतरे। शुरुआती मुकाबले में दूसरा स्थान हासिल किया। 1500 मीटर में रजत और 1800 मीटर में स्वर्ण पदक मिला। फाइनल में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की। सलमान ने बातया कि जब जापान में भारत का तिरंगा लहराया तो वह क्षण उनके लिए बेहद गर्व का था। डबल स्कल में मिला कांस्य उनका हौसला बढ़ाने वाला है। अब उनका लक्ष्य देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता, सेना के अधिकारियों, प्रशिक्षकों, चयन टीम और सहयोगियों को दिया। भाई-बहनों में सबसे बड़े सलमान के पिता मोहम्मद कासिम खान के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई। बहनें रिजवाना और बुसरा विवाहित हैं। छोटे भाई मोहम्मद अदनान, मोहम्मद अयान और मोहम्मद नोमान पढ़ाई कर रहे हैं। मां जबरून निशा, पत्नी शाहिबा खातून और नानी इस्लामून घर पर रहती हैं। सलमान की उपलब्धि पर पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। नायब सूबेदार सलमान ने कहा कि पढ़ाई के साथ खेलों को भी समय दें। नशे और मोबाइल की लत से दूर रहकर लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें। पूरी लगन और निष्ठा से मेहनत करने पर सफलता जरूर मिलती है।

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