मध्य प्रदेश के बालाघाट से दो दोस्तों ने महाशिवरात्रि के दिन केदारनाथ धाम के लिए अनोखी दंडवत यात्रा शुरू की। करीब सात महीने की कठिन यात्रा के बाद दोनों दोस्त बुधवार को आगरा पहुंचे। एक दोस्त दंडवत करते हुए आगे बढ़ रहा है, तो दूसरा नंगे पैर साइकिल से उसके साथ चल रहा है और यात्रा का सामान संभाल रहा है। बालाघाट निवासी निर्मल उईके और तुलेद्र मडावी ने 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के दिन इस यात्रा की शुरुआत की थी। निर्मल उईके दंडवत करते हुए केदारनाथ की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं उनके दोस्त तुलेद्र मडावी साइकिल पर सामान लेकर नंगे पैर उनके साथ पदयात्रा कर रहे हैं। दोनों का लक्ष्य वर्ष 2027 के अप्रैल माह के आसपास केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन करना है। दोस्तों की कहानी भी इस यात्रा जितनी ही खास है। दोनों दोस्तों के गांव की दूरी 100 किलोमीटर है। कक्षा 12वीं तक दोनों ने अलग-अलग संस्थानों में पढ़ाई की। इसके बाद बालाघाट शहर में उनकी दोस्ती हुई। दोस्ती गहरी हुई तो दोनों ने एक निजी कंपनी में साथ काम भी किया।अब नौकरी और सामान्य जिंदगी से अलग दोनों ने एक ऐसा संकल्प लिया है, जिसने उन्हें हजारों किलोमीटर की आध्यात्मिक यात्रा पर ला दिया। दोनों दोस्तों का कहना है कि उनकी यात्रा का उद्देश्य केवल केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा के दर्शन करना नहीं है, यात्रा के दौरान वे लोगों को पर्यावरण संरक्षण, बहन-बेटियों की सुरक्षा और विश्व शांति के प्रति जागरूक कर रहे हैं। रास्ते में जगह-जगह लोगों से संवाद कर वे इन मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। बालाघाट से शुरू हुई यह दोस्ती अब केदारनाथ की राह पर एक अनोखे सफर की कहानी बन गई है। सात महीने बाद आगरा पहुंचे दोनों युवकों को देखने और उनकी यात्रा के बारे में जानने के लिए लोग भी उत्सुक नजर आए। दोनों का कहना है कि मंजिल दूर है, लेकिन बाबा केदार के दर्शन और समाज को शांति, सुरक्षा व पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का संकल्प उन्हें लगातार आगे बढ़ा रहा है।