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VIDEO: मधुमेह मरीजों को लापरवाही पड़ी भारी, आंखों की रोशनी घटने के साथ हो गई किडनी-हृदय की बीमारी

डॉक्टर तो ऐसे ही कहते हैं एक रसगुल्ला से कुछ नहीं होता। नियमित दवाएं न लेने के साथ फिटनेस पर भी ध्यान नहीं देना। ये सभी लापरवाही मधुमेह मरीजों को भारी पड़ गईं। उन्हें न्यूरोपैथी, रेटिनोपैथी और नेफ्रोपैथी जैसी गंभीर बीमारियों ने घेर लिया। इससे न सिर्फ आंखों की रोशनी घट गई बल्कि किडनी-हृदय की बीमारियां भी हो गईं। एसएन मेडिकल कॉलेज के सोशल प्रिवेंटिव मेडिसिन (एसपीएम) विभाग के शोध में लापरवाही बरतने वाले 30.03 फीसदी मधुमेह मरीज कई बीमारियों से पीड़ित मिले। विभाग ने एक साल में 30 से 65 साल तक के 323 (144 पुरुष, 179 महिलाएं) मरीजों पर शोध किया। इनमें 76.6 फीसदी शहरी और 25.4 ग्रामीण क्षेत्र के रहे। इनकी डाइट, शारीरिक गतिविधि, ब्लड शुगर, एचबीएवनसी टेस्ट की जानकारी जुटाने के साथ कई जरूरी जांचें भी कराई गईं। शोध में देखा गया कि 70 फीसदी यानी 226 मरीजों ने डॉक्टरी सलाह को गंभीरता से नहीं लिया। मीठा, कोल्डड्रिंक, फास्टफूड भी खाया। रोजाना पैदल चलने, व्यायाम करने से भी परहेज किया। ब्लड शुगर और एचबीएवनसी की जांच में भी सुस्ती बरती। इससे 97 मरीजों का मधुमेह स्तर अनियंत्रित रहा। इससे उनकी नजर कमजोर हो गई। तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ने से किडनी-हृदय रोग की क्षमता भी प्रभावित हुई। नसें कमजोर होने से धमनियों में वसा की भी परेशानी बन गई। डॉक्टर की बात नहीं मानने से कई गंभीर रोग हो गए। वहीं डॉक्टरी सलाह पर अमल करने वाले मरीजों को राहत मिली।

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