भारत के सेवारत एवं सेवानिवृत्त अर्धसैनिक बलों के कर्मियों ने अर्धसैनिक बलों को लेकर एक वरिष्ठ नागरिक की कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है। कर्मियों ने विशेष रूप से मुख्यमंत्री के साथ बैठक में मौजूद अर्धसैनिक कर्मियों को कथित तौर पर ‘काली टोपी वाले लोग’ कहे जाने पर नाराजगी व्यक्त की है। सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ऐसी टिप्पणी अर्धसैनिक बलों के जवानों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली है। उनका कहना है कि अर्धसैनिक बलों के जवान संवेदनशील सीमाओं, महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े दायित्वों का निर्वहन कठिन परिस्थितियों में करते हैं। कर्मियों ने संबंधित व्यक्ति से अपनी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां तत्काल वापस लेने और अर्धसैनिक बलों के जवानों तथा उनके परिवारों से सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। बयान में कहा गया है कि किसी भी विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी तथ्यों, समझ और विवेक के आधार पर होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को सरकार, प्रशासन या अर्धसैनिक बलों से संबंधित कोई शिकायत या मतभेद है तो उसे संबंधित मंच पर तथ्य और तर्क के साथ उठाया जाना चाहिए। कर्मियों ने यह भी कहा कि निराधार या सामान्यीकृत टिप्पणियों से किसी समस्या का समाधान नहीं होता और इससे समाज में अनावश्यक कटुता पैदा हो सकती है। बयान में कहा गया है कि वर्दी, टोपी और सैनिक सेवा से जुड़े प्रतीक अनुशासन, कर्तव्य, त्याग और राष्ट्रसेवा से जुड़े हैं। इन्हें सार्वजनिक मंच पर उपहास या अपमान का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। अर्धसैनिक कर्मियों ने कहा कि बलों के जवानों ने बिना भेदभाव और बिना प्रचार की अपेक्षा के देश की सेवा की है। उनके अनुसार, उनकी सेवा और योगदान का सम्मान किया जाना चाहिए। बयान में संबंधित राज्य एजेंसियों से भी आग्रह किया गया है कि यदि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किसी व्यक्ति की सार्वजनिक गतिविधियों या वक्तव्यों से कानून-व्यवस्था, सामाजिक सद्भाव या नागरिकों के संबंध में वास्तविक आशंका उत्पन्न होती है तो कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उचित संज्ञान लिया जाए। साथ ही, सेवारत और सेवानिवृत्त अर्धसैनिक कर्मियों ने जिम्मेदार नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और मीडिया से सार्वजनिक विमर्श में मर्यादा, संयम और तथ्यों का सम्मान बनाए रखने की अपील की है। बयान में कहा गया है कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति व्यक्त करते समय उन लोगों के सम्मान का ध्यान रखा जाना चाहिए जो देश की सुरक्षा से जुड़े दायित्व निभाते हैं। अर्धसैनिक कर्मियों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में सार्वजनिक संवाद अधिक जिम्मेदार, तथ्यपरक और मर्यादित रहेगा तथा सुरक्षा बलों के योगदान और बलिदान का सम्मान किया जाएगा।