कमला नेहरू अस्पताल यानी केएनएच से गायनी ओपीडी और वार्ड को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में शिफ्ट करने के विरोध में अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति का सचिवालय मार्च शुरू हुआ। शिमला के टोलेंड से कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए सचिवालय की ओर आगे बढ़े। प्रदर्शन में शहर के विभिन्न हिस्सों से दर्जनों महिलाएं शामिल हुईं। महिलाओं ने गायनी ओपीडी और वार्ड को शिफ्ट करने के विरोध में जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केएनएच महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान है और यहां उपलब्ध गायनी सेवाओं को हटाने से मरीजों को परेशानी हो सकती है। जनवादी महिला समिति की कार्यकर्ता जब सचिवालय का घेराव करने पहुंचीं तो पुलिस के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हो गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बहस होती रही। महिला समिति की कार्यकर्ताओं ने गायनी ओपीडी और वार्ड को केएनएच से आईजीएमसी शिफ्ट करने के फैसले पर विरोध जताया। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। मार्च में अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के साथ छात्र संगठन एसएफआई और मजदूर संगठन सीटू के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महिलाओं को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केएनएच में गायनी सेवाएं लंबे समय से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में ओपीडी और वार्ड को दूसरी जगह शिफ्ट करने से मरीजों, तीमारदारों और दूरदराज से आने वाली महिलाओं को अतिरिक्त दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। सचिवालय मार्च के माध्यम से महिला समिति ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखने की कोशिश की। समिति ने गायनी ओपीडी और वार्ड को केएनएच से आईजीएमसी शिफ्ट करने के फैसले को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान सचिवालय के बाहर पुलिस की मौजूदगी में माहौल तनावपूर्ण बना रहा। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है।