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बीसीएस में रामलीला मंचन में कलाकारों ने दमदार अभिनय से बटोरी वाहवाही

शिमला। सीता स्वयंवर में एक ओर धनुष उठाने की चुनौती थी तो दूसरी ओर राजाओं के चुटीले संवादों ने दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर दिया। मंच पर देश-विदेश से आए राजाओं की भूमिका निभा रहे कलाकारों ने अनूठे अंदाज में अपना परिचय दिया तो पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। बीसीएस में श्री रामलीला हाइलैंडर स्पोर्ट्स क्लब की ओर से मंगलवार रात रामलीला के तीसरे दिन सीता स्वयंवर का मंचन किया गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने कलाकारों की प्रस्तुति का आनंद लिया। स्वयंवर के बाद भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इसके बाद दशरथ परिवार का दृश्य दिखाया और बारात प्रस्थान का प्रसंग मंचित किया गया। अंत में धाम का दृश्य प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर रामलीला स्थल पर उपस्थित लोगों को धाम भी परोसी गई। रामलीला का मंचन रात करीब 11:30 बजे तक चला। इस मौके पर क्लब के प्रबंधक एमवी कुमार, धर्मेंद्र चंदेल सहित अन्य लोग मौजूद रहे। इन कलाकारों ने निभाईं भूमिकाएं रामलीला में भगवान श्रीराम की भूमिका संदीप, लक्ष्मण की भूमिका दीप, सीता की भूमिका पारस, रावण की भूमिका नरेश कुमार, हनुमान की भूमिका रिशु, कुंभकर्ण की भूमिका काकु, विभीषण की भूमिका डिंपी, सुग्रीव की भूमिका संजू, बाली की भूमिका पुनीत और मेघनाद की भूमिका यशपाल ने निभाई। वर्ष 1983 से हो रहा रामलीला का मंचन श्री रामलीला हाइलैंडर स्पोर्ट्स, बीसीएस की ओर से वर्ष 1983 से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। अगले वर्ष रामलीला के मंचन के स्थान पर रामायण का पाठ करवाने की योजना है। इसके बाद रामलीला का मंचन दोबारा शुरू किया जाएगा और इसे लगातार 14 साल तक आयोजित किया जाएगा। समय के साथ रामलीला के मंचन के स्वरूप में भी बदलाव आया है। पहले दृश्यों की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए कपड़े के पर्दों का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब उनकी जगह फ्लेक्स से बनी सीनरी ने ले ली है। क्लब की आर्थिक स्थिति बेहतर होने के साथ मंच सज्जा और कलाकारों की वेशभूषा में भी बदलाव आया है। पहले कलाकार साधारण कपड़े पहनकर मंचन करते थे, लेकिन अब उनके लिए चमकदार पोशाकें खरीदी जा रही हैं।

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