रविवार को हुई तेज बारिश ने एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अनाज मंडियों में शुमार जगराओं मंडी में किए गए प्रबंधों की पोल खोलकर रख दी। मंडी में पानी भरने से किसानों और आढ़तियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस बीच, मंडी के हालात का जायजा लेने पहुंचे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री एवं भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब सरकार को व्यवस्थाओं के मोर्चे पर विफल करार दिया। सोमवार को आम आदमी पार्टी की सरकार में मार्केट कमेटी के चेयरमैन कुलविंदर सिंह झज्ज (काला) ने बिट्टू पर तीखा पलटवार करते हुए उनके दौरे को ड्रामेबाजी करार दिया और उनके किसान हितैषी होने के दावों पर सवाल खड़े किए। चेयरमैन झज्ज ने कहा कि अगर बिट्टू वास्तव में किसानों के इतने बड़े हितैषी हैं तो उन्हें किसानों के मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय अपने सांसद और केंद्रीय मंत्री रहते हुए किए गए कामों का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जगराओं की इस प्रमुख अनाज मंडी और यहां के किसानों के हित में बिट्टू ने अपने कार्यकाल के दौरान क्या योगदान दिया? ‘किसान हितैषी हैं तो पहले शैलरों को खाली करवाएं’ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान झज्ज ने बिट्टू को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह सच में किसानों के पक्ष में हैं तो पहले शैलरों में पड़े धान को निकलवाने के लिए प्रयास करें, ताकि वहां धान की नई फसल पहुंचाने का रास्ता साफ हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि धान की लिफ्टिंग के बीच स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग उठाकर भाजपा नेता ऐसा माहौल बना रहे हैं, जिससे लेबर और ट्रक चालकों का ध्यान धान की उठान से हटकर स्पेशल में माल भरने की तरफ जा सकता है और मंडी में लिफ्टिंग प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। झज्ज ने कहा कि किसानों के नाम पर बयानबाजी करने से उनकी समस्याएं हल नहीं होंगी। इसके लिए खरीद, उठान और भंडारण की व्यवस्था को सुचारू बनाने की जरूरत है। माझा में बाढ़ के दौरान घोषित 1,600 करोड़ रुपये का हिसाब मांगा चेयरमैन झज्ज ने माझा क्षेत्र में बाढ़ के दौरान 1,600 करोड़ रुपये देने के किए गए वादे का हिसाब मांगते हुए बिट्टू पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बिट्टू को यह भी बताना चाहिए कि अपने सांसद और केंद्रीय मंत्री के कार्यकाल में उन्होंने जगराओं के विकास के लिए क्या किया। किसान आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए झज्ज ने सवाल किया कि जब किसान करीब डेढ़ साल तक अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे थे, तब न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी के लिए बिट्टू ने क्या ठोस कदम उठाए? उन्होंने कहा कि किसानों के प्रति हमदर्दी जताने से पहले भाजपा नेता को अपने कार्यकाल का लेखा-जोखा देना चाहिए। विधायक माणूके नहीं पहुंचीं, झज्ज ने संभाला मोर्चा मार्केट कमेटी की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, पहले यह प्रेस कॉन्फ्रेंस हलका विधायक बीबी सरबजीत कौर माणूके द्वारा की जानी थी। हालांकि, निर्धारित समय पर उनके मार्केट कमेटी कार्यालय नहीं पहुंचने के कारण चेयरमैन कुलविंदर सिंह झज्ज (काला) ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने मंडी के प्रबंधों पर सरकार का पक्ष रखते हुए बिट्टू के आरोपों का जवाब दिया। प्राकृतिक आपदा बताई बारिश, ट्यूबवेल चलाकर निकाला पानी मंडी में जलभराव के मुद्दे पर झज्ज ने कहा कि बेमौसमी बारिश एक प्राकृतिक आपदा है, लेकिन प्रशासन ने पानी की निकासी के लिए तुरंत कदम उठाए। उन्होंने बताया कि ट्यूबवेल चलाकर मंडी से पानी निकाला गया और मजदूर लगाकर बंद पड़े सीवरेज चैंबरों की सफाई भी करवाई गई। धान की खरीद प्रभावित होने के आरोपों को खारिज करते हुए झज्ज ने दावा किया कि 17 प्रतिशत से कम नमी वाले धान की सरकारी खरीद और उठान लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि जगराओं मंडी में सरकारी खरीद पहले ही शुरू हो चुकी है। हालांकि, बारिश के बाद मंडी में हुए जलभराव ने निकासी व्यवस्था और धान की फसल को सुरक्षित रखने के इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों को बारिश के बीच अपनी फसल की सुरक्षा और समय पर खरीद व उठान की चिंता सता रही है। मंडी के खराब फड़ों के लिए पिछली सरकारों को ठहराया जिम्मेदार मंडी के फड़ों की खराब हालत को लेकर झज्ज ने अकाली-भाजपा और कांग्रेस की पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मंडी का मौजूदा ढांचा पुरानी सरकारों के समय का बना हुआ है, जबकि आम आदमी पार्टी की सरकार वर्ष 2022 में सत्ता में आई थी। झज्ज ने दावा किया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने ग्रामीण सड़कों के विकास के लिए मंडी बोर्ड के माध्यम से 1,345 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अलावा जगराओं अनाज मंडी में नई हाईमास्ट लाइटें लगाने का काम भी किया जा रहा है। किसानों की परेशानी के बीच सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज जगराओं अनाज मंडी में बारिश से हुए जलभराव ने जहां किसानों और आढ़तियों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, वहीं इस मुद्दे पर भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच सियासी टकराव भी तेज हो गया है। बिट्टू ने मंडी के प्रबंधों पर सवाल उठाकर पंजाब सरकार को घेरा, तो झज्ज ने उनके पुराने कार्यकाल और किसान हितैषी होने के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया।