इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चल रहे विश्वकर्मा स्वरोजगार स्वदेशी मेले के दूसरे दिन यह बात खानपान के स्टॉलों पर साफ नजर आई। आगरा का पेठा, उन्नाव की मशहूर कुशली और हापुड़ के पापड़ ने देसी स्वाद के साथ अपनी आकर्षक पैकिंग से भी लोगों का ध्यान खींचा। अलग-अलग जिलों से आए खाद्य उत्पादों ने एक ही जगह कई शहरों का स्वाद समेट दिया। आगरा के स्टॉल पर पेठे की अलग-अलग किस्में सजी हैं। उन्नाव की कुशली और हापुड़ के पापड़ भी अपनी खास पहचान के साथ मौजूद हैं। कहीं मसालों की खुशबू लोगों को रोक रही है तो कहीं सलीके से पैक किए गए उत्पाद देखकर लोग उनके बारे में जानकारी ले रहे हैं। इन स्टॉलों की खासियत सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि स्थानीय उत्पाद को बाजार के लायक बनाने की कोशिश भी है। आकर्षक पैकिंग, उत्पाद की पहचान और बिक्री के तरीके के बारे में जानकारी लेने वालों में युवा भी शामिल हैं। मेले में ग्रामीण और छोटे उद्यमियों के उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने और उन्हें बड़े बाजार से जोड़ने की तस्वीर दिखाई दे रही है।