फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ISRO ने लॉन्च किया EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट, चीन-पाकिस्तान पर ऐसे रखेगा नजर!

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Fri, 04 Sep 2026 05:39 AM IST

अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से EOS-05 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया है। शुक्रवार तड़के 2 बजकर 55 मिनट पर GSLV-F17 रॉकेट के जरिए इस मिशन को लॉन्च किया गया। प्रक्षेपण के करीब 22 मिनट बाद मिशन डायरेक्टर ने मिशन की सफलता की घोषणा की। इस ऐतिहासिक मौके पर इसरो प्रमुख वी. नारायणन समेत कई पूर्व इसरो अध्यक्ष और वैज्ञानिक मौजूद रहे।

इसरो के मुताबिक, GSLV-F17 की यह 19वीं उड़ान है। इस मिशन को कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि EOS-05 भारत का पहला अत्याधुनिक भू-तुल्यकालिक इमेजिंग सैटेलाइट बताया गया है। यानी ऐसा उपग्रह जो जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की इमेजिंग करने में सक्षम होगा।

मिशन का मकसद पृथ्वी की निगरानी और अंतरिक्ष से अहम तस्वीरें तथा जानकारी हासिल करना है। उपग्रह को उप-भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में स्थापित किया गया है, जहां से आगे की कक्षीय प्रक्रिया के जरिए यह अपने निर्धारित ऑर्बिट में पहुंचेगा। इस कक्षा में पहुंचने के बाद EOS-05 पृथ्वी के एक बड़े हिस्से को बार-बार देखने और निगरानी करने में सक्षम होगा।

EOS-05 का वजन करीब 2,367 किलोग्राम है। इसे खास तौर पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की इमेजिंग के लिए तैयार किया गया है। इस मिशन को NSIL की ओर से एक रणनीतिक उपयोगकर्ता के लिए समर्पित लॉन्च के तौर पर अंजाम दिया गया। इसके साथ भारत और दूसरे देशों के उपयोगकर्ताओं के 18 सह-यात्री उपग्रह भी भेजे गए।

इस सफल लॉन्च के बाद इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने वैज्ञानिकों और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने बताया कि श्रीहरिकोटा से यह इसरो का 107वां प्रक्षेपण है। उन्होंने कहा कि GSLV-F17 में लगातार सुधार और उन्नयन के बाद रॉकेट अपने मौजूदा स्वरूप में काम कर रहा है।

इसरो प्रमुख ने मिशन की सफलता के पीछे वैज्ञानिकों की टीमवर्क को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा कि इस मिशन में औद्योगिक जगत के सहयोग के साथ वैज्ञानिकों की मेहनत भी महत्वपूर्ण रही। वैज्ञानिकों के परिवारों के योगदान का भी उन्होंने विशेष तौर पर उल्लेख किया।

मिशन डायरेक्टर थॉमस कुरियन समेत इसरो के अन्य वैज्ञानिकों ने सफलता के बाद देशवासियों को बधाई दी। वैज्ञानिकों ने एक साथ ‘जय हिंद’ का उद्घोष किया। इस दौरान इसरो पदाधिकारी इम्तियाज ने टीम के हौसले की तारीफ करते हुए कहा कि ऊंची उड़ान का हौसला हो तो आसमान की ऊंचाई मायने नहीं रखती।

अब जरा उस रॉकेट की बात, जिसने EOS-05 को अंतरिक्ष तक पहुंचाया। GSLV-F17 की लंबाई करीब 51.7 मीटर और लिफ्ट-ऑफ मास करीब 420.5 टन है। इसे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के सेकंड लॉन्च पैड से लॉन्च किया गया। रॉकेट के ऊपर करीब 4 मीटर व्यास वाली ओगिव कंपोजिट पेलोड फेयरिंग लगी थी, जिसके अंदर EOS-05 को सुरक्षित रखा गया था।

इस मिशन की सफलता भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं का एक और उदाहरण है। अर्थ ऑब्जर्वेशन और जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग की क्षमता भारत के लिए रणनीतिक और वैज्ञानिक, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण है।

यानी श्रीहरिकोटा से एक और सफल उड़ान के साथ भारत ने अंतरिक्ष में अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है। वैज्ञानिकों की मेहनत, स्वदेशी तकनीक और लगातार अपग्रेड होते लॉन्च व्हीकल के दम पर इसरो ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया है कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
 

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें