फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रामपुर बुशहर: बस हादसे के बाद फूटा नोग घाटी के ग्रामीणों का गुस्सा, एनएच-5 पर डेढ़ घंटे प्रदर्शन

रामपुर बुशहर की नोग घाटी स्थित राय-शरण में हुए एचआरटीसी बस हादसे के बाद मंगलवार को ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया। सड़क सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर नाराज लोगों ने नेशनल हाईवे-5 पर करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने लोक निर्माण और परिवहन मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हादसे की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना था कि हादसे ने क्षेत्र में बसों की सुरक्षा और सड़कों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मांग की कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाकर जरूरी कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। प्रदर्शन की सूचना मिलने पर तहसीलदार, हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) और लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता (एसडीओ) मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें शांत करने का प्रयास किया। ग्रामीणों की मांगों और समस्याओं पर चर्चा करने के लिए बुधवार दोपहर बाद बैठक आयोजित करने की बात कही गई। प्रदर्शन के दौरान नोग युवक मंडल, डंसा और घाटी के विभिन्न जनसंगठनों की ओर से प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन में राय-शरण बस दुर्घटना की निष्पक्ष जांच करवाने और हादसे के कारणों का पता लगाकर जवाबदेही तय करने की मांग की गई। इसमें हादसे में दो लोगों की मौत और एक दर्जन से अधिक लोगों के घायल होने का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई गई। ग्रामीणों ने कहा कि दुर्घटना के बाद केवल जांच तक सीमित रहने के बजाय ऐसे ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, जिनसे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने प्रशासन से हादसे के कारणों की गंभीरता से पड़ताल करने और कमियों को दूर करने का आग्रह किया। ग्रामीणों ने रामपुर बुशहर और आसपास के ग्रामीण मार्गों पर चलने वाली बसों की नियमित तकनीकी जांच करवाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जांच में खराब या असुरक्षित पाई जाने वाली बसों का संचालन बंद किया जाना चाहिए, ताकि यात्रियों की जान जोखिम में न पड़े। इसके अलावा दुर्घटना संभावित मार्गों पर मजबूत क्रैश बैरियर लगाने, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत करवाने, गड्ढे भरने और आवश्यक चेतावनी संकेतक स्थापित करने की मांग भी की गई। ग्रामीणों का कहना था कि सड़क सुरक्षा से जुड़े इन उपायों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाना चाहिए। ज्ञापन में हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को उचित मुआवजा देने और घायलों को आर्थिक सहायता के साथ बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने का आग्रह किया गया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी पर निराधार आरोप लगाना नहीं है, बल्कि हादसे की निष्पक्ष जांच करवाकर कमियों को सामने लाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन के साथ प्रस्तावित बैठक और उसमें उनकी मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर है।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें