तुगल क्षेत्र के प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता बगलामुखी मंदिर सेहली में वार्षिक जाग श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। इस दौरान रातभर मंदिर परिसर में माता के भजनों की गूंज रही और श्रद्धालु भक्तिरस में डूबे रहे। क्षेत्र के साथ-साथ दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। वार्षिक जाग के अवसर पर पंचकुला हरियाणा के प्रसिद्ध गायक जसपाल जस्सी और जयपाल सहोता के अलावा यतिन, अभिनव, अग्नि भजन मंडली साईंगलु, शर्मा भजन मंडली सेहली और गायक नंद लाल ने माता के भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भजन संध्या के दौरान ‘आज मेरी मैया ने औणा है’, ‘जय देवा कमरूनागा हो’, ‘आया लोडी मंडी मेले जो’, ‘ऊंचा पहाड़ा लाया डेरा ओ शेरावालिए’ और ‘सेहली धारा री भगवती ये, करी लेने दर्शन तेरे माईये’ जैसे भजनों ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए रात्रि भोज की भी व्यवस्था की गई थी। भजन संध्या के दौरान मंदिर परिसर में देर रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और पूरा वातावरण माता के जयकारों से भक्तिमय रहा। मंदिर के पुजारी अमरजीत शर्मा ने बताया कि रात 12 बजे माता की विशेष पूजा-अर्चना के साथ वार्षिक जाग का शुभारंभ हुआ। जाग के दौरान देवताओं और डायनियों के बीच होने वाले युद्ध की कथा भी सुनाई गई। देववाणी के माध्यम से गूर ने बताया कि देवता आषाढ़ माह की शैण देवी एकादशी को युद्ध के लिए प्रस्थान करते हैं। इस युद्ध का निर्णायक चरण भाद्रपद माह में होता है। इसी परंपरा के तहत वार्षिक जाग में देवताओं और डायनियों के बीच हुए मुकाबलों का वर्णन किया गया। मान्यता के अनुसार देवताओं और डायनियों के बीच कुल सात बार मुठभेड़ हुई। पहला युद्ध समुद्र के टापू पर हुआ, जबकि अंतिम युद्ध घोषर धार नामक स्थान पर हुआ। इन सात मुकाबलों में तीन बार देवता विजयी रहे, जबकि चार बार डायनियों को जीत मिली। इस वर्ष हुए अंतिम युद्ध में डायनियां शिख-पाथा लेकर चली गईं। इसी आधार पर इस बार डायनियों को विजयी माना गया। वार्षिक जाग के दौरान क्षेत्र के लोगों ने माता बगलामुखी के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। भजन, पूजा-अर्चना और देववाणी के बीच श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ वार्षिक जाग में भाग लिया।