जय इंदरूनाग मंदिर में आगामी 17 सितंबर को संक्रांति के पावन अवसर पर वार्षिक भेड़े का मेला श्रद्धा, उत्साह और लोक परंपराओं के रंग में धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। मेले के भव्य और सुचारू संचालन के लिए मंदिर सेवा समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। समिति की ओर से विभिन्न उप-कमेटियों का गठन कर उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। इस बार मेले में प्राचीन ग्रामीण विरासत और लोक संस्कृति को सहेजने पर विशेष जोर दिया जाएगा। आधुनिक दौर में धीरे-धीरे लुप्त हो रही पारंपरिक खेल गतिविधियों को फिर से जीवंत करने और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए कई प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। मेले में समुंदर टापू, पिठ्ठू, पांच गिट्टियां और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों के मुकाबले होंगे। आयोजकों का कहना है कि इन खेलों के आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को पारंपरिक ग्रामीण खेलों और संस्कृति से जोड़ना भी है। खेल प्रतियोगिताओं के साथ मेले में लोक गायन और लोक नृत्य के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। इनके माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करने और उन्हें नशे से दूर रखने के उद्देश्य से इस बार नशा निवारण विषय पर विशेष भाषण प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। आयोजकों के अनुसार युवाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता पैदा करने के साथ उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। मेले के आयोजन को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में सेवा समिति के अध्यक्ष नीरज व्यास, उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम, राजेंद्र जोगी, राजेश हैप्पी, सुरेंद्र कुमार और अनु विशेष रूप से मौजूद रहे। समिति ने श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों से मेले में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया है।