वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने प्रदेश के शिक्षण संस्थानों के एडमिशन फॉर्म से जाति का कॉलम हटाने की दिशा में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की पहल का स्वागत किया है। उन्होंने इसे साहसिक, ऐतिहासिक और सामाजिक समानता की दिशा में दूरगामी फैसला बताया। डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि व्यवस्था परिवर्तन केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सरकार की कार्यशैली का हिस्सा है। उनके अनुसार शिक्षा संस्थान बच्चों को समानता, भाईचारे और मानवता की सीख देने वाले स्थान हैं। ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान ही किसी बच्चे की पहचान जाति के आधार पर तय करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि एडमिशन फॉर्म से जाति का कॉलम हटाने की पहल समाज में जातिगत भेदभाव को कम करने और नई पीढ़ी में समानता की भावना मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। डॉ. वर्मा ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि वर्षों से चली आ रही व्यवस्था पर नए नजरिए से विचार करने का साहस दिखाना जरूरी था। उन्होंने कहा कि समाज को जातियों के आधार पर बांटने के बजाय प्रत्येक बच्चे को सबसे पहले एक समान भारतीय नागरिक के रूप में देखने की सोच आधुनिक और मजबूत भारत की नींव तैयार कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता और अवसरों का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद और वंचित परिवारों तक पहुंचना चाहिए। सामाजिक न्याय की नीतियों का मूल उद्देश्य भी यही होना चाहिए कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिले। डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने कहा कि समय के साथ सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां बदल रही हैं। ऐसे में सरकारी व्यवस्थाओं और नीतियों की समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। उन्होंने सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों पर व्यापक राष्ट्रीय विमर्श की आवश्यकता भी जताई। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री सुक्खू के कार्यकाल में व्यवस्था सुधार और आम व्यक्ति को समान अवसर देने के उद्देश्य से कई फैसले लिए गए हैं। एडमिशन फॉर्म से जाति का कॉलम हटाने की पहल को उन्होंने इसी सोच का हिस्सा बताया। डॉ. वर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश से शुरू हुई यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी विचार का विषय बन सकती है। उन्होंने कहा कि जाति और धर्म के आधार पर समाज को बांटने वाली राजनीति से ऊपर उठकर भारत और प्रत्येक भारतीय के लिए काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हमारी पहली पहचान भारतीय होने की है। समान अवसर, समान सम्मान और सामाजिक न्याय के रास्ते पर चलकर ही हम एक मजबूत भारत का निर्माण कर सकते हैं।” डॉ. वर्मा ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का इस पहल के लिए पुनः आभार जताते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश से समानता की दिशा में उठाया गया यह कदम आने वाले समय में देश के लिए भी सकारात्मक संदेश बन सकता है।