रेलवे स्टेशन पर शनिवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। चलती अंडमान एक्सप्रेस ट्रेन के दरवाजे पर लटके यात्री तरुण प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच करीब 200 मीटर तक घसीटते चले गए, लेकिन महिला रेलवे सुरक्षा कर्मी के जज्बे, यात्रियों की मानवता और खुद के धैर्य से उनकी जान बच गई। रोहतक रेलवे स्टेशन पर सुबह करीब 11:50 बजे प्लेटफॉर्म-एक पर अंडमान एक्सप्रेस ट्रेन अपने गंतव्य की ओर जाने लिए पहुंची थी। इस बीच यात्री तरुण दिल्ली में एक शोक सभा में शामिल होने जा रहा था। अंदेशा है कि उन्होंने चलती ट्रेन में सवार होने की कोशिश की और संतुलन बिगड़ने से दरवाजे का हैंडल पकड़कर लटक गया। ट्रेन ने रफ्तार पकड़ ली तो वह प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच करीब 200 मीटर तक घिसते हुए झूलने लगे। हाथ छूटता तो सीधे पहियों की चपेट में आ जाते। ट्रेन में सवार व्यक्तियों ने भी पूरी मदद की। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात महिला आरपीएफ हेड कांस्टेबल मनीषा (मनीता) की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने बिना समय गंवाए ट्रेन के पीछे-पीछे दौड़ लगाई और जोर-जोर से लोगों को चेन खींचने के लिए आवाज लगाई। उनकी आवाज सुनकर कोच में मौजूद यात्रियों ने सतर्कता दिखाई और जंजीर खींचकर ट्रेन रोक दी। वहीं, पीछे से आ रहे अन्य पुलिस कर्मियों ने गार्ड को ट्रेन रोकने के लिए अनुरोध किया। ट्रेन रुकने पर यात्री तरुण को सुरक्षित नीचे उतारा गया। तरुण बोले-सॉरी, मैं माफी मांगता हूं ट्रेन रुकने के बाद यात्रियों का उन्हें देखने के लिए तांता लग गया। लोगों लगा उन्हें कुछ नुकसान तो नहीं हो गया। हड़बड़ाए और मौत के मुंह से निकले तरुण ने दरवाजे से निकलते ही सॉरी बोलकर सभी से माफी मांगी। उसने बताया कि जल्दबाजी में उसने यह गलती कर दी। आगे से ध्यान रखूंगा। यात्री तरुण के पेंट घसीट लगने के कारण फट गई थी। मौके पर बाहरी चोट होने का ज्यादा अंदेशा नहीं लगा रेलवे के कर्मियों ने बताया कि भारतीय रेलवे अधिनियम की धारा 156 के तहत चलती ट्रेन के दरवाजे पर लटकना, सफर करना या चलते वाहन में चढ़ना-उतरना कानूनन अपराध माना जाता है। चलती ट्रेन में कभी भी चढ़ने-उतरने का प्रयास न करें। एक मिनट की जल्दबाजी जान पर भारी पड़ सकती है। थोड़ा धैर्य और सतर्कता से आप खुद और दूसरों की जिंदगी बचा सकते हैं। महिला सुरक्षा कर्मी व यात्रियों की सूझ-बूझ से यात्री की जान बच सकी है। -रूप चंद मीना, थाना प्रभारी, रेलवे सुरक्षा बल, रोहतक।