किसी की जिंदगी में हुई एक गलती उसे लंबे समय तक पहचान दे सकती है, लेकिन क्या वही गलती पूरी जिंदगी का फैसला भी कर दे? इसी सवाल का जवाब तलाश रही है हरियाणा की एक अनूठी पहल ‘उड़ान म्यूजिक बैंड’। जेल में रहे और अब बाहर आ चुके ऐसे लोगों को संगीत के मंच से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिनमें गाने और संगीत की प्रतिभा है। मकसद है कि अतीत की पहचान पीछे छूटे और हुनर उनकी नई पहचान बने। इस पहल की शुरुआत झज्जर जिले के बहादुरगढ़ निवासी और नूंह जिला जेल में तैनात हवलदार प्रदीप जेलपुरिया ने की है। अब तक प्रदेश के अलग-अलग जिलों के करीब 10 लोग इस समूह से जुड़ चुके हैं। इनमें कोई ट्रक चलाकर परिवार पाल रहा है तो कोई संगीत के जरिए अपनी पुरानी पहचान बदलने की कोशिश कर रहा है। कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने जेल में संगीत सीखा और बाहर आने के बाद उसी हुनर को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना। प्रदीप बताते हैं कि जेल में ड्यूटी के दौरान उन्होंने कई ऐसे लोगों को देखा, जो काम करते हुए गुनगुनाते थे। उनके भीतर संगीत की प्रतिभा थी, लेकिन उसे मंच नहीं मिला था। यहीं से विचार आया कि यदि इन लोगों को सही दिशा और मंच दिया जाए तो उनकी ऊर्जा को सकारात्मक काम में लगाया जा सकता है।