अपनी लंबित मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे एलसीएलओ कर्मचारियों का रविवार को चौथा दिन है। अनशन पर बैठी करनाल की नीतू और झज्जर के संजीव कुमार की तबीयत बिगड़ने लगी है। कर्मचारियों का आरोप है कि चार दिन बीतने के बाद भी उनसे बातचीत करने के लिए कोई अधिकारी या मंत्री नहीं पहुंचा है। एलसीएलओ (लोकल कमेटी लोकल ऑपरेटर) कर्मचारियों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के बाद उन्हें न तो नियमित कार्य दिया गया और न ही उचित मानदेय या वेतन का लाभ मिल पाया। कर्मचारियों का कहना है कि भर्ती विज्ञापन में सीपीएलओ पद के आधार पर चयन प्रक्रिया हुई थी, लेकिन बाद में बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थियों को एलसीएलओ पदनाम दिया गया। कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि एलसीएलओ कर्मचारियों को सीपीएलओ पद पर समायोजित या परिवर्तित किया जाए। इसके साथ ही सभी चयनित कर्मचारियों को नियमित और स्पष्ट कार्य देने, कार्य के अनुरूप उचित मानदेय या वेतन देने तथा कार्य और मानदेय से संबंधित लंबित समस्या का शीघ्र समाधान करने की मांग की गई है। भर्ती प्रक्रिया और पदनाम परिवर्तन से जुड़े मामलों पर सरकार से स्पष्ट निर्णय लेने की भी मांग है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया में मेहनत कर सफलता हासिल की है। इसके बावजूद उन्हें अपने अधिकारों और रोजगार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना पड़ रहा है। तीन सितंबर से शुरू हुई अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के माध्यम से सरकार का ध्यान समस्याओं की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। एलसीएलओ यूनियन ने सरकार से मांगों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए कर्मचारियों से बातचीत करने और समस्या का समाधान करने की अपील की है।